भुवनेश्वर , अगस्त 16 -- ओडिशा में एक जून से 16 अगस्त के बीच 953 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गयी है जो सामान्य 759 मिलीमीटर के मुकाबले 27 फीसदी अधिक है। राज्य में एक बार फिर बाढ़ की स्थिति बनने के बीच मुख्य सचिव अनु गर्ग ने रविवार को प्रभावित इलाकों में राहत, बचाव और बहाली कार्य तेज करने के निर्देश दिये हैं।

ताजा बाढ़ से 49 प्रखंड, 331 ग्राम पंचायत, 947 गांव और पांच शहरी क्षेत्र प्रभावित हुए हैं तथा करीब 5.15 लाख लोग प्रभावित हुए हैं। अब तक 2.37 लाख लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है।

सुश्री गर्ग ने विशेष राहत आयुक्त (एसआरसी) कार्यालय में उच्चस्तरीय बैठक में बाढ़ की स्थिति की समीक्षा की। बैठक में राजस्व एवं आपदा प्रबंधन, जल संसाधन, स्वास्थ्य, ऊर्जा, आवास एवं शहरी विकास तथा मत्स्य एवं पशु संसाधन विकास विभागों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। बालासोर, भद्रक, जाजपुर, मयूरभंज और क्योंझर के जिलाधिकारी तथा भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) भुवनेश्वर की क्षेत्रीय निदेशक मनोरमा मोहंती वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से बैठक में शामिल हुईं।

आईएमडी के अनुसार, उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और उससे लगे पश्चिम बंगाल-उत्तर ओडिशा तट पर बने कम दबाव के क्षेत्र के प्रभाव से उत्तरी ओडिशा में बारिश की गतिविधियां बढ़ रही हैं। अगले 24 घंटे में इस प्रणाली के और मजबूत होने की संभावना है, जिससे बारिश बढ़ सकती है। बालासोर, भद्रक, जाजपुर, मयूरभंज और क्योंझर के लिए रेड वार्निंग जारी की गयी है, जबकि राज्य के अधिकांश अन्य जिलों के लिए ऑरेंज और कुछ जिलों के लिए येलो वार्निंग जारी की गयी है। इन पांच जिलों में 18 अगस्त तक बारिश जारी रहने और उसके बाद धीरे-धीरे कमी आने का अनुमान है।

जिला प्रशासन की ओर से 293 राहत शिविर संचालित किए जा रहे हैं, जहां पका हुआ भोजन और आवश्यक सूखा राशन उपलब्ध कराया जा रहा है। प्रभावित जिलों में ओडिशा आपदा त्वरित कार्रवाई बल (ओडीआरएएफ) की 36, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) की सात और अग्निशमन सेवा की 43 टीमें तैनात की गयी हैं।

स्वास्थ्य विभाग ने चिकित्सा दल और त्वरित प्रतिक्रिया दल तैनात किए हैं तथा आवश्यक दवाओं, हैलोजन टैबलेट, ब्लीचिंग पाउडर और सांप के काटने से बचाव की दवाओं का भंडार तैयार रखा है। जलभराव के कारण करीब 75,000 बिजली उपभोक्ता अब भी बिजली से वंचित हैं। जिन इलाकों से बाढ़ का पानी उतर गया है, वहां बिजली आपूर्ति बहाल करने का काम जारी है।

जल संसाधन विभाग संवेदनशील तटबंधों की चौबीसों घंटे निगरानी कर रहा है और कमजोर स्थानों को मजबूत करने के लिए रेत की बोरियों का इस्तेमाल किया जा रहा है। वरिष्ठ इंजीनियरों को प्रभावित जिलों में तैनात किया गया है, ताकि बाढ़ की स्थिति पर नजर रखने के साथ पानी उतरने के बाद तटबंधों में हुए कटाव और टूट-फूट की मरम्मत की जा सके।

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