भुवनेश्वर , मार्च 21 -- ओडिशा ने पिछले दो वर्षों में वन और वृक्ष आवरण में 558 वर्ग किलोमीटर की वृद्धि दर्ज की है, जिससे यह देश में वन संरक्षण और हरित आवरण निर्माण में अग्रणी राज्य के रूप में उभरा है।
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने शनिवार को यहां राज्य-स्तरीय 'विश्व वन दिवस-2026' समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि वन संरक्षण में राज्य की सफलता बेहतर वन प्रबंधन पद्धतियों, बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण अभियानों और जन जागरूकता पहलों के कारण संभव हो पायी है।
वर्तमान में राज्य का वन और वृक्ष आवरण राज्य के कुल भौगोलिक क्षेत्र का 37.63 प्रतिशत है और यह 58,597 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र फैला हुआ है। वृक्षारोपण प्रयासों का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के अभियान 'एक पेड़ मां के नाम' के तहत, ओडिशा ने एक ही दिन में 149 लाख (1.49 करोड़) पौधे लगाये और एक वर्ष के भीतर 800 लाख (आठ करोड़) से अधिक पौधे लगाये।
मुख्यमंत्री ने पर्यावरण संरक्षण और औद्योगिक विकास के बीच संतुलन बनाने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि आधुनिक विज्ञान और तकनीक की मदद से पर्यावरण को नुकसान पहुंचाये बिना भी टिकाऊ औद्योगीकरण हासिल किया जा सकता है।
इस साल विश्व वन दिवस-2026 की थीम 'जंगल और अर्थव्यवस्था' का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जंगल न सिर्फ़ पर्यावरण के लिए ज़रूरी हैं, बल्कि आर्थिक विकास में भी अहम भूमिका निभाते हैं। उन्होंने सरकार के इस लक्ष्य को दोहराया कि जंगलों को सुरक्षित रखते हुए, उन्हें आजीविका का एक बड़ा ज़रिया बनाया जाये।
श्री माझी ने अधिकारियों से कहा कि वे जंगलों में लगने वाली आग को रोकने और इंसानों तथा जंगली जानवरों के बीच होने वाले टकराव को कम करने के प्रयासों को और तेज़ करें। उन्होंने इंसानों की वजह से जंगलों में लगने वाली आग के लिए ज़िम्मेदार लोगों के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई करने के निर्देश दिये। वन, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन मंत्री गणेश राम सिंह खुंटिया ने इस दिन के महत्व पर प्रकाश डाला और जंगलों पर निर्भर समुदायों, खासकर आदिवासी बहुल ज़िलों में रहने वाले लोगों की आजीविका को बेहतर बनाने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया।
इस मौके पर मुख्य सचिव अनु गर्ग ने 2036 और 2047 के लिए राज्य के दीर्घकालिक दृष्टिकोण की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि ओडिशा का लक्ष्य महत्वपूर्ण आर्थिक विकास हासिल करना और रोज़गार के नये अवसर पैदा करना है। उन्होंने बताया कि अकेले पर्यटन क्षेत्र में ही 25 लाख नौकरियां पैदा करने की क्षमता है, जिसमें जंगलों की अहम भूमिका होगी। उन्होंने कहा कि जंगलों को सिर्फ़ पर्यावरण के लिए ही नहीं, बल्कि आर्थिक संपत्ति के तौर पर भी देखा जाना चाहिए, ताकि 'नीली अर्थव्यवस्था' के साथ-साथ 'हरित अर्थव्यवस्था' को भी बढ़ावा मिल सके। इस अवसर पर विभाग के प्रधान सचिव भास्कर ज्योति शर्मा, प्रधान मुख्य वन संरक्षक और वन बल प्रमुख डॉ. के. मुरुगेसन और अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे।
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