भुवनेश्वर , सितंबर 11 -- ओडिशा पुलिस ने शुक्रवार को राज्य सरकार के 'अमा साथी' ह्वाट्सएप चैटबॉट के तहत 14 नागरिक सुविधाएं शुरू की हैं। इस पहले के बाद अब लोगों को सामान्य कामकाज के सिलसिले में पुलिस स्टेशनों या दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने होंगे।

ओडिशा पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) बिनयतोष मिश्रा ने यहां डीजीपी कैंप कार्यालय में यह एकीकृत सेवा शुभारंभ की। इसके ज़रिये नागरिक पुलिस सेवाओं के लिए आवेदन करने, दस्तावेज जमा करने, आवेदनों की स्थिति जांचने और डिजिटल रूप से जारी दस्तावेजों को सीधे ह्वाट्सएप पर ही प्राप्त करने में सक्षम होंगे।

इन 14 सुविधाओं में चरित्र प्रमाण पत्र, वरिष्ठ नागरिक पंजीकरण, कर्मचारी सत्यापन, किरायेदार/पीजी सत्यापन, घरेलू सहायकों का सत्यापन, खोई हुई संपत्ति या दस्तावेज़ों की रिपोर्ट/पंजीकरण, गुमशुदा व्यक्तियों की जानकारी और पंजीकरण, शिकायत पंजीकरण, लाउडस्पीकर के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी), आयोजनों एवं प्रदर्शनों की अनुमति, प्राथमिकी की प्रतियां तथा सड़क दुर्घटनाओं, चोरी हुए वाहनों और चोरी के मामलों से संबंधित अंतिम रिपोर्ट शामिल हैं।

नागरिक अपने मोबाइल फोन में 9437292000 नंबर पर ह्वाट्सएप 'संदेश' भेजकर इन सुविधाओं का लाभ उठा सकते हैं। अपनी भाषा और आवश्यक सेवा का चयन करने के बाद, आवेदक ज़रूरी विवरण और दस्तावेज जमा कर सकते हैं। इसके बाद आवेदन संबंधित पुलिस कार्यालय या अधिकारी को भेज दिया जाता है और उसकी स्थिति जानने के लिए एक संदर्भ संख्या जारी की जाती है।

राज्य की डिजिटल गवर्नेंस पहल के हिस्से के रूप में मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी की ओर से 25 दिसंबर 2025 को शुरू किया गया 'अमा साथी' प्लेटफॉर्म 24 घंटे उपलब्ध रहने वाला ह्वाट्सएप-आधारित नागरिक सेवा मंच है। गृह विभाग के ओआरटीपीएसए ढांचे के तहत इन पुलिस सेवाओं को इस प्लेटफॉर्म से जोड़ा गया है।

यह पहल शासन आधुनिकीकरण केंद्र (सीएमजीआई), राज्य अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एससीआरबी), ओडिशा पुलिस और मेटा इंडिया (ह्वाट्सएप) के साझा प्रयास से तैयार की गयी है। इसमें ज़रूरी तकनीकी तालमेल का काम एससीआरबी ने पूरा किया है।"इस विस्तार का उद्देश्य पुलिस सेवाओं को अधिक तेज, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित बनाना है, ताकि लोग पुलिस दफ़्तरों में जाने के बजाय घर बैठे ही सामान्य सुविधाओं का उपयोग कर सकें।

इस मौके पर एससीआरबी के निदेशक अविनाश कुमार ने स्वागत भाषण दिया। इस दौरान अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (कानून एवं व्यवस्था) संजय कुमार, पुलिस आयुक्त एस देवदत्त सिंह, आईजी (एसटीएफ) हिमांशु लाल, आईजी (गुप्तचर) सत्यब्रत भोई, आईजी (क्राइम ब्रांच) सार्थक सारंगी और सीएमजीआई के कार्यकारी निदेशक सुरेंद्र कुमार मीणा सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

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