भुवनेश्वर , जुलाई 01 -- ओडिशा पुलिस ने एक अंतरराज्यीय मानव तस्करी गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए छह नाबालिगों सहित सात पीड़ितों को छुड़ाया है। इसके साथ ही पुलिस ने एक समन्वित अभियान में हैदराबाद से दो आरोपियों को भी गिरफ्तार किया है।
पुलिस सूत्रों ने बुधवार को बताया कि मानव तस्करी के संबंध में मिली पुख्ता खुफिया जानकारी के आधार पर, गजपति जिले की एक विशेष टीम ने उप-मंडलीय पुलिस अधिकारी (एसडीपीओ) आर. उदयगिरि राकेश साहू की देखरेख में और हैदराबाद पुलिस की मदद से हैदराबाद में चंद्रा उर्फ सरिता जैन नाम की एक आरोपी के ठिकाने पर छापेमारी की।
इस अभियान के दौरान पुलिस ने छह नाबालिग लड़कियों और एक वयस्क महिला सहित सात पीड़ितों को छुड़ाया, जिन्हें कथित तौर पर आरोपी के नियंत्रण में रखा गया था। छुड़ाई गयी सभी पीड़ितों को सुरक्षित रूप से उनके परिवारों से मिला दिया गया है। श्री साहू ने बताया कि ईश्वर कुसुलिया और चंद्रा नाम के दो आरोपियों को पकड़ा गया और सक्षम अदालत के समक्ष पेश किया गया, जहां से उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। उन्होंने कहा कि तस्करी नेटवर्क के अन्य सदस्यों की पहचान करने, उनके आपराधिक इतिहास की जांच करने, डिजिटल और दस्तावेजी सबूत जुटाने तथा किसी भी अन्य पीड़ित को छुड़ाने के लिए आगे की जांच जारी है।
पुलिस के अनुसार, यह मामला शिकायतकर्ता की बहन के 21 जून को अपने घर से लापता होने के बाद दर्ज करायी गयी एक लिखित शिकायत से शुरू हुआ था। परिवार के सदस्यों द्वारा काफी प्रयासों के बाद भी उसका कुछ पता नहीं चल सका था। हालांकि, 24 जून को शाम करीब चार बजे पीड़िता ने फोन पर अपने परिवार से संपर्क किया और खुलासा किया कि रायगढ़ा के ईश्वर कुसुलिया ने नौकरी का झूठा झांसा देकर उससे और उसकी एक सहेली से संपर्क किया था। पुलिस ने बताया कि आरोपी ने कथित तौर पर पीड़ितों को अडावा थाना क्षेत्र के अंतर्गत बीरीकोट बुलाया और मोटरसाइकिल से उन्हें गुमुकुडी गांव स्थित अपने आवास पर ले गया, जिसके बाद वह उन्हें नौकरी दिलाने के बहाने हैदराबाद ले गया।
जांच के दौरान यह आरोप सामने आया कि आरोपी ने पीड़ितों को रोजगार देने के बजाय दोनों को 70,000 रुपये में चंद्रा को बेच दिया था। पीड़ितों ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें गलत तरीके से बंधक बनाकर रखा गया, शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया, मोबाइल फोन का उपयोग करने से रोका गया और अनैतिक गतिविधियों के लिए मजबूर किया गया।
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