भुवनेश्वर , अगस्त 14 -- ओडिशा पुलिस ने शुक्रवार को प्रदेशव्यापी साइबर सुरक्षा जागरूकता अभियान की शुरुआत की और 40 लाख से ज्यादा प्रतिभागियों तक पहुंच बनायी।

स्कूल एवं जनशिक्षा विभाग तथा उच्च शिक्षा विभाग के सहयोग से आयोजित यह अभियान अपराध शाखा के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक बिनायतौष मिश्रा की अध्यक्षता में दोपहर से लाइव वेबकास्टिंग और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित किया गया।

पुलिस सूत्रों के मुताबिक साइबर सुरक्षा जागरूकता अभियान में डिजिटल प्लेटफॉर्म के सुरक्षित और जिम्मेदार उपयोग को बढ़ावा दिया गया। इसके जरिए बढ़ते साइबर अपराध से निपटने के लिए राज्य भर के 40 लाख से अधिक विद्यार्थियों, शिक्षकों, अभिभावकों और पुलिसकर्मियों तक पहुंच बनायी गयी। इस कार्यक्रम में 35 पुलिस जिलों के 20,000 से अधिक स्कूलों और 2,000 कॉलेजों ने भाग लिया। इसका मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों और युवाओं को उभरते साइबर खतरों, ऑनलाइन धोखाधड़ी, ब्लैकमेल और डिजिटल शोषण के प्रति संवेदनशील बनाना था। अभियान में युवाओं से "साइबर जागरूकता के राजदूत" बनने और अपने परिवारों, दोस्तों व समुदायों के बीच साइबर सुरक्षा की जानकारी का प्रचार-प्रसार करने का आग्रह किया गया। ओडिशा के राज्यपाल हरि बाबू कमभंपति ने अपने संदेश में छात्रों से साइबर खतरों के प्रति सतर्क और जागरूक रहने का आग्रह किया।

मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने एक साइबर-सुरक्षित ओडिशा के निर्माण में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया और उनसे अपने समुदायों में साइबर जागरूकता को बढ़ावा देने का आह्वान किया।

अभियान में साइबर वित्तीय धोखाधड़ी के बाद के शुरुआती महत्वपूर्ण समय पर विशेष जोर दिया गया। पीड़ितों को तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करने और राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल के माध्यम से घटना की रिपोर्ट करने की सलाह दी गयी। प्रतिभागियों को बताया गया कि धोखाधड़ी की जानकारी तुरंत देने से ठगी के पैसे को वापस पाने की सम्भावनाएं बढ़ जाती हैं। प्रतिभागियों को सावधान किया गया कि बैंक, सरकारी एजेंसियां और पुलिस अधिकारी कभी भी ओटीपी, पिन, सीवीवी या पासवर्ड जैसी गोपनीय जानकारी नहीं मांगते हैं। उन्हें सलाह दी गयी कि वे ऐसी जानकारी किसी के साथ साझा न करें। अभियान में लोगों को "डिजिटल अरेस्ट" घोटालों के प्रति भी आगाह किया गया। इसमें इस बात पर जोर दिया गया कि डिजिटल अरेस्ट के नाम पर पैसे की कोई भी मांग फर्जी है और इसकी सूचना तुरंत 1930 पर दी जानी चाहिए।

अभियान के दौरान लोगों को मौद्रिक लाभ के लिए अपने बैंक खाते, सिम कार्ड या पहचान दस्तावेज दूसरों को न सौंपने की भी सलाह दी गयी। डरा-धमकाकर ऑनलाइन पैसे ठगना या डिजिटल शोषण के अन्य रूपों का सामना कर रहे छात्रों से आग्रह किया गया कि वे घबरायें नहीं और न ही पैसे दें। इसके बजाय, उन्हें तुरंत अपने माता-पिता, शिक्षकों या पुलिस को सूचित करें और प्रासंगिक डिजिटल साक्ष्य अपने पास सुरक्षित रखें।

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