भुवनेश्वर , सितंबर 19 -- ओडिशा सरकार ने नशीली दवाओं के दुरुपयोग और तस्करी के खिलाफ़ अपना अभियान तेज़ करते हुए अधिकारियों को 'नशा मुक्त भारत अभियान' (एनएमबीए) के तहत कानून लागू करने, पुनर्वास, जागरूकता और वैकल्पिक आजीविका से जुड़ी पहलों को मज़बूत करने का निर्देश दिया है।
लोक सेवा भवन में सीआईडी -अपराध शाखा की स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) द्वारा बुलाई गई एक उच्च-स्तरीय बैठक में अभियान की प्रगति की समीक्षा करते हुए मुख्य सचिव अनु गर्ग ने नशीली दवाओं की मांग और तस्करी को रोकने तथा प्रभावित लोगों के समय पर इलाज, पुनर्वास और समाज में उनकी वापसी सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न विभागों, ओडिशा पुलिस, ज़िला प्रशासन और अन्य संबंधित पक्षों के बीच आपसी तालमेल के साथ काम करने पर ज़ोर दिया है।
बैठक में अवैध नशीली दवाओं की तस्करी के खिलाफ़ की गई कार्रवाई, नशीली दवाओं की मांग कम करने के उपाय, जन-जागरूकता पहल और इलाज और पुनर्वास कार्यक्रमों की समीक्षा की गई।
एसटीएफ के महानिरीक्षक जनरल हिमांशु लाल ने बैठक में जून 2026 में हुई सातवीं राज्य नारको-समन्वय बैठक के बाद से नशीली दवाओं की तस्करी के खिलाफ़ तेज़ की गई कार्रवाई के बारे में जानकारी दी और अब तक हुई प्रगति से प्रतिभागियों को अवगत कराया।
नशीली दवाओं और मादक पदार्थों की अवैध तस्करी की रोकथाम (पीआईएनडीपीएस) अधिनियम के तहत दर्ज मामलों की स्थिति की भी समीक्षा की गई।नशीली दवाओं के 'हॉटस्पॉट' के तौर पर पहचाने गए छह जिलों - मलकानगिरी, कोरापुट, रायगढ़ा, कंधमाल, गजपति और बौध - में ब्लॉक, ग्राम पंचायत और गांव के स्तर पर प्रवर्तन और जागरूकता गतिविधियां तेज कर दी गई हैं।
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