भुवनेश्वर , अक्टूबर 22 -- ओडिशा ने सिकल सेल रोग से जुड़ी मातृ मृत्यु दर में कमी लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए इस बीमारी से प्रभावित महिलाओं के गर्भावस्था का प्रबंधन करने के लिए एक व्यापक प्रोटोकॉल तैयार किया है। यह राज्य में मातृ स्वास्थ्य देखभाल को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

इस प्रोटोकॉल की प्रस्तुति गुरुवार को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, ओडिशा, रक्त सुरक्षा निदेशालय और यूनिसेफ ओडिशा द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित "गर्भावस्था के दौरान सिकल सेल रोग" विषय पर एक दिवसीय राज्य स्तरीय समीक्षा-सह-प्रसार कार्यशाला में की गई।

इस कार्यशाला का उद्देश्य 'सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन कार्यक्रम' के क्रियान्वयन की समीक्षा करना था। साथ ही, इसमें 21 अधिक प्रभावित जिलों के जिला जन स्वास्थ्य अधिकारियों (डीपीएचओ) और सहायक प्रबंधकों (एनसीडी) को संवेदनशील बनाना था। इसके अलावा, इसमें एनएचएम के अधिकारी और विलियम जे. क्लिंटन फाउंडेशन सहित प्रमुख विकास साझेदारों के प्रतिनिधि भी शामिल थे।

ओडिशा सिकल सेल कार्यक्रम के तहत जांच एवं पहचान के प्रयासों में सबसे आगे बना हुआ है। उम्मीद है कि नया विकसित प्रोटोकॉल, सिकल सेल रोग से प्रभावित गर्भवती महिलाओं को समय पर और उचित देखभाल सुनिश्चित करने के लिए, अलग-अलग स्तरों पर स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं को व्यवस्थित क्लिनिकल मार्गदर्शन एवं स्पष्ट रूप से निर्धारित देखभाल प्रदान करेगा।

सिकल सेल रोग से पीड़ित महिलाओं में गर्भावस्था के दौरान, सामान्य गर्भावस्था की तुलना में स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बहुत ज्यादा होते हैं। जटिलताओं को कम करने और मां तथा शिशु के स्वास्थ्य परिणामों को बेहतर बनाने के लिए समय पर पहचान, नियमित निगरानी और व्यवस्थित चिकित्सा हस्तक्षेप बहुत ज़रूरी हैं।

यह प्रोटोकॉल राज्य में अपनी तरह का पहला है। इसे राज्य के मेडिकल कॉलेजों, एनएचएम कार्यक्रम प्रभागों, स्वास्थ्य सेवा निदेशालय और यूनिसेफ के विशेषज्ञों के संयुक्त प्रयासों से तैयार किया गया है। तकनीकी सत्रों के दौरान, प्रतिभागियों ने सिकल सेल कार्यक्रम की वर्तमान स्थिति की समीक्षा की और जांच, उपचार, फॉलो-अप सेवाओं तथा परिवहन सुविधाओं को मजबूत करने के उपायों पर चर्चा की।

उन्होंने चालू वर्ष के लिए नियोजित नई पहलों पर भी चर्चा की और सिकल सेल रोग से पीड़ित महिलाओं में गर्भावस्था के प्रबंधन के लिए हाल ही में लागू किए गए प्रोटोकॉल के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त की। कार्यशाला का समापन एक संयुक्त कार्य योजना तैयार करने के साथ हुआ जिसका उद्देश्य जिला स्तर पर इस प्रोटोकॉल को प्रभावी एवं समन्वित तरीके से लागू करना है।

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, इस पहल से सिकल सेल रोग से पीड़ित गर्भवती महिलाओं के लिए स्वास्थ्य सेवाएं मजबूत होने की उम्मीद है। साथ ही, यह सिकल सेल एनीमिया को खत्म करने और गर्भावस्था से जुड़ी रोकी जा सकने वाली स्वास्थ्य जटिलताओं को कम करने के राज्य के व्यापक प्रयासों में भी योगदान देगी।

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