भुवनेश्वर , जून 23 -- ओडिशा ने खरीफ 2026 सीजन की तैयारी तेज करते हुए एक एकीकृत और सक्रिय रणनीति अपनाई है, जिसका उद्देश्य किसानों को अल नीनो के संभावित खतरों के असर से बचाना और पूरे राज्य में खेती के विकास को सुनिश्चित करना है।
राज्य सरकार ने अपनी तैयारी उपायों के तहत पहले ही राज्य और जिला दोनों स्तरों पर आकस्मिक फसल योजना लागू कर दिए हैं। उसने जिलों को अधिक प्रखंड स्तरीय आकस्मिक योजना बनाने का निर्देश दिया है।
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में मंगलवार को एक उच्च-स्तरीय ऑनलाइन बैठक के दौरान इन उपायों की समीक्षा की गई, जिसमें ओडिशा की खरीफ की तैयारियों और अल नीनो से जुड़ी संभावित चुनौतियों से निपटने की राज्य की रणनीति का आकलन किया गया। ओडिशा के उपमुख्यमंत्री कनक वर्धन सिंह देव ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक में हिस्सा लिया।
भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार इस साल दक्षिणी-पश्चिमी मानसून सामान्य से कम यानी 92 प्रतिशत रहने की उम्मीद है। इस अनुमान को देखते हुए आठ जिलों देवगढ़, सुंदरगढ़, क्योंझर, मयूरभंज, कोरापुट, रायगढ़ा, मलकानगिरी और नबरंगपुर को खास निगरानी में रखा गया है।
राज्य प्रशासन बुवाई में देरी, नमी की कमी, जलाशयों में पानी का स्तर कम होना और कीड़ों का बढ़ना जैसे मुख्य खतरों की पहचान करते हुए उनके असर को कम करने के लिए बचाव के उपाय कर रहा है। ओडिशा ने खेती की उत्पादकता बनाए रखने के लिए खरीफ सीजन के दौरान 57.88 लाख हेक्टेयर में फसल उगाने के कार्यक्रम को अंतिम रूप दिया है। सरकार ने किसानों के समर्थन को भी मजबूत किया है।
इसके लिए सब्सिडी वाली दरों पर प्रमाणित बीज बांटे हैं और सीजन के बीच में किसी भी आपातकाल से निपटने के लिए 14,350 क्विंटल का बीज रखा है, जिसमें 7,500 क्विंटल धान के बीज और 6,850 क्विंटल धान से इतर के बीज शामिल हैं।
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