भुवनेश्वर , सितंबर 18 -- ओडिशा क्रिकेट एसोसिएशन (ओसीए) ने उड़ीसा उच्च न्यायालय में पदाधिकारियों के मुख्य पदों पर चुनाव टालने के अपने फैसले का बचाव किया है।

एसोसिएशन ने न्यायालय से कहा कि वह भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड (बीसीसीआई) के नियमों से इतर काम नहीं कर सकती, क्योंकि ऐसा करने से उसकी सदस्यता और मिलने वाले अनुदान पर खतरा मंडरा सकता है।

यह जवाब ओसीए अध्यक्ष पंकज लोचन मोहंती ने ललितेश बिद्याधर महापात्र की रिट याचिका के जवाब में दाखिल जवाबी हलफनामे में दिया। याचिकाकर्ता ने ओसीए नियमावली के अध्याय दो, नियम छह के तहत अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव, संयुक्त सचिव और कोषाध्यक्ष के पदों के लिए तय समय सीमा के भीतर चुनाव कराने और तिथि घोषित करने का निर्देश देने की गुहार लगायी थी।

श्री मोहंती ने तर्क दिया कि ओसीए बीसीसीआई का पूर्णकालिक सदस्य है और वह संस्था के नियमों से बंधा है। उन्होंने कहा कि न्यायमूर्ति आरएम लोढा समिति की सिफारिशों पर उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के अनुसार बनाये गये नियम राज्य क्रिकेट संघों के पदाधिकारियों के लिए तीन वर्ष का कार्यकाल निर्धारित करते हैं।

ओसीए अध्यक्ष ने कहा कि एसोसिएशन बीसीसीआई से मिलने वाले अनुदान पर निर्भर है और उसके नियमों के किसी भी उल्लंघन के परिणामस्वरूप वित्तीय सहायता रोकी जा सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कोई राज्य निकाय लगातार दो वर्षों तक अनुदान से वंचित रहता है तो बीसीसीआई उसकी सदस्यता रद्द कर सकता है और राज्य से नियमों का पालन करने वाले किसी अन्य संघ को मान्यता दे सकता है।

चुनाव टालने की वजह बताते हुए श्री मोहंती ने कहा कि ओसीए शुरू में इस भ्रम में था कि राष्ट्रीय खेल शासन अधिनियम, 2025 के तहत क्रिकेट 'अधिसूचित खेल' है। उन्होंने कहा कि इस बात को लेकर भी अनिश्चितता थी कि बीसीसीआई और राज्य क्रिकेट संघ इस नये कानून के दायरे में आते हैं या नहीं।

इसी वजह से 31 अगस्त 2025 को हुई ओसीए की विशेष आम बैठक में चुनाव टालने का फैसला लिया गया था।

हलफनामे के अनुसार, यह निर्णय कटक के बाराबती स्टेडियम में नौ दिसंबर 2025 को होने वाले अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच और तत्कालीन नये खेल कानून की स्थिति को ध्यान में रखकर लिया गया था।

बैठक में यह प्रस्ताव पारित किया गया था कि मौजूदा पदाधिकारी ही संघ की ओर से अपना काम करते रहेंगे।

श्री मोहंती ने कहा कि बीसीसीआई ने बाद में अपने जवाबी हलफनामे में स्थिति स्पष्ट की थी कि क्रिकेट को 2025 कानून के तहत 'अधिसूचित खेल' के रूप में शामिल नहीं किया गया है और बीसीसीआई इसके प्रावधानों के अधीन नहीं है।

श्री मोहंती ने अदालत में कहा कि बीसीसीआई का स्थायी संबद्ध सदस्य होने के नाते ओसीए बीसीसीआई के नियमों के विपरीत रुख नहीं अपना सकता। इसके किसी भी नियम से भटकने पर उसकी सदस्यता और बीसीसीआई अनुदान की पात्रता दोनों पर जोखिम उत्पन्न हो सकता है।

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