. भुवनेश्वर , जुलाई 19 -- ओडिशा में जंगल पर निर्भर हज़ारों परिवारों को समुदाय नेतृत्व आधारित वानिकी पहल से आय के नए स्रोत और उम्मीद मिल रही है। यह पहल आजीविका पैदा करने के साथ-साथ टिकाऊ वन प्रबंधन को भी जोड़ती है। अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी।

जो पहल जंगल पर निर्भर संघर्षरत परिवारों के लिए छोटी सी आर्थिक मदद के तौर पर शुरू हुई थी, वह अब ओडिशा में बड़े पैमाने पर ग्रामीण बदलाव का रूप ले चुकी है। विधवाओं को सफल उद्यमी बनने में मदद करने से लेकर किसानों को टिकाऊ आजीविका गतिविधियों के ज़रिए अपनी आय के स्रोत बढ़ाने में सक्षम बनाने तक, 'ओडिशा वानिकी क्षेत्र विकास परियाेजना (ओएफएसडीपी-2 ) लगातार हज़ारों लोगों के जीवन को बेहतर बना रही है और साथ ही समुदाय के नेतृत्व वाले वन संरक्षण को मज़बूत कर रही है।

ऐसी ही एक लाभार्थी हैं झारसुगुडा वन प्रभाग के देवधारा गांव की सैरेंद्री सिदार। पति की मौत के बाद, उन्हें दिहाड़ी मज़दूरी करके अपने परिवार का भरण-पोषण करने में संघर्ष करना पड़ा। स्थानीय 'वन सुरक्षा समिति' (वीएसएस) से 15,000 रुपये का लोन मिलने के बाद उनकी किस्मत बदल गई, जिससे उन्हें परवल की खेती शुरू करने में मदद मिली।

सैरेंद्री ने कहा, "इस ' लोन ने मेरी ज़िंदगी बदल दी। इसने मुझे एक स्थिर आय और आगे बढ़ने का आत्मविश्वास दिया।"सैकड़ों किलोमीटर दूर गंजम ज़िले में, दक्षिण घुमुसर फ़ॉरेस्ट डिवीज़न के गुंडीबिरा वीएसएस के उपेंद्र नायक ने भी कामयाबी की ऐसी ही कहानी लिखी है। इस परियोजना की मदद से उन्होंने ऑयस्टर मशरूम की खेती शुरू की। पिछले सर्दियों के मौसम में उन्होंने 80 बेड से 110 किलो मशरूम उगाए और 16,500 रुपये कमाए, जिससे उनके घर की आमदनी में काफ़ी सुधार हुआ।

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