भुवनेश्वर , जुलाई 21 -- ओडिशा के बालेश्वर जिले को झींगा के लिए 'उत्पादन और प्रसंस्करण केंद्र' घोषित किया गया है। यह राज्य में जलकृषि और मत्स्य पालन बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के तहत मत्स्य पालन विभाग ओडिशा सरकार द्वारा प्रस्तुत प्रस्तावों और सिफारिशों के आधार पर बालेश्वर सहित देश भर में मत्स्य पालन और 'एक्वाकल्चर क्षेत्र' के समग्र विकास के लिए कई योजनाओं और कार्यक्रमों को लागू कर रहा है।

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2014-15 से अब तक पिछले 12 वर्षों में मत्स्य पालन विभाग ने ओडिशा में मत्स्य पालन और जलकृषि विकास के लिए 'नीली क्रांति' और 'प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना' के तहत 1,567.96 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं में 549.58 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता शामिल है, जिसके अंतर्गत बालेश्वर जिला भी आता है।

इसके अलावा, मत्स्य पालन और जलकृषि अवसंरचना विकास कोष के तहत ओडिशा के लिए 784.32 करोड़ रुपये की कुल लागत और 286.39 करोड़ रुपये की ब्याज सब्सिडी वाली 13 परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई है। इनमें से 8.26 करोड़ रुपये की दो परियोजनाएं अकेले बालेश्वर जिले में लागू की जा रही हैं।

वर्ष 2014-15 से 2025-26 के दौरान नीली क्रांति और प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत बालेश्वर में कई प्रमुख पहलें की गई हैं। इनमें 49.94 करोड़ रुपये की लागत से चांदीपुर मत्स्य बंदरगाह का विकास, बस्ता में 78.20 करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक थोक मछली बाजार की स्थापना, पांच जलवायु-अनुकूल तटीय मछुआरा गांवों का विकास, छह कोल्ड स्टोरेज व बर्फ संयंत्र इकाइयों की स्थापना, और बाहाबलपुर तट पर 2.57 करोड़ रुपये की लागत से 'इंडियन पोम्पानो' मछली के समुद्री पिंजरा पालन तकनीक का प्रदर्शन शामिल है।

जिले ने 107 हेक्टेयर खारे पानी के क्षेत्र को जलकृषि के तहत लाया है और तीन फिनफिश हैचरी (अंडा देने का सुरक्षित) तथा एक झींगा हैचरी की स्थापना की है, जिससे इसके जलकृषि पारिस्थितिकी तंत्र को और मजबूती मिली है।

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