भुवनेश्वर , अगस्त 08 -- एम्स-भुवनेश्वर ओडिशा के दो जिलों में उन्नत तपेदिक (टीबी) जांच की पायलट परियोजना शुरू करने की योजना बना रहा है। इस पहल का उद्देश्य सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली में उन्नत निदान तकनीकों को व्यापक स्तर पर लागू करने की व्यवहार्यता का आकलन करने के लिए वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाना है।

एम्स-भुवनेश्वर में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन और टीबी पर नीति संवाद के दौरान इस प्रस्ताव पर चर्चा हुई। सम्मेलन में नीति निर्माता, जन स्वास्थ्य विशेषज्ञ, वैज्ञानिक, चिकित्सक, शोधकर्ता, राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम (एनटीईपी) के अधिकारी, विकास साझेदार और स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ शामिल हुए। सम्मेलन का मुख्य फोकस टीबी की जांच, निगरानी और अनुसंधान को मजबूत करने तथा टीबी-मुक्त भारत के लक्ष्य को गति देने पर रहा।

ओडिशा विधानसभा अध्यक्ष सुरमा पाढ़ी ने समापन समारोह को संबोधित करते हुए दवा-प्रतिरोधी टीबी की जल्द पहचान और उन्नत जांच तकनीकों के इस्तेमाल की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि उन्नत जीनोटाइपिक जांच से जुड़े पायलट प्रोजेक्ट शुरू किए जाने चाहिए, ताकि वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाकर भविष्य की नीतियों के लिए उनका इस्तेमाल किया जा सके। उन्होंने कहा कि टीबी-मुक्त भारत का लक्ष्य केवल एक सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इसे सामूहिक जिम्मेदारी, वैज्ञानिक प्रगति और समुदाय की भागीदारी से संचालित राष्ट्रीय अभियान के रूप में आगे बढ़ाया जाना चाहिए।

श्रीमती पाढ़ी ने एम्स-भुवनेश्वर, ओडिशा सरकार और अन्य संबंधित पक्षों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर भी जोर दिया, ताकि वैज्ञानिक शोध से प्राप्त साक्ष्यों को प्रभावी सार्वजनिक स्वास्थ्य उपायो में बदला जा सके। उन्होंने सार्वभौमिक औषधि संवेदनशीलता जांच (यूडीएसटी) के महत्व को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि इससे दवा-प्रतिरोधी टीबी की जल्द पहचान करने, उपचार के परिणामों में सुधार लाने और संक्रमण के प्रसार को कम करने में मदद मिलेगी।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री मुकेश महालिंग ने कहा कि टीबी उन्मूलन के लिए सरकारी एजेंसियों, चिकित्सा संस्थानों, प्रयोगशालाओं, शोधकर्ताओं, अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्यकर्मियों, विकास साझेदारों और समुदायों के बीच समन्वित प्रयास जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार उन्नत निदान तकनीकों की व्यवहार्यता, किफायत और बड़े स्तर पर इस्तेमाल की संभावनाओं का आकलन करने के लिए एम्स-भुवनेश्वर और अन्य संबंधित पक्षों के साथ साक्ष्य आधारित पायलट परियोजनाओं में सहयोग करने को तैयार है।

एम्स-भुवनेश्वर के कार्यकारी निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. आशुतोष बिस्वास ने कहा कि संस्थान विशेष रूप से पूर्वी भारत में टीबी अनुसंधान, आणविक निदान, जीनोमिक्स और साक्ष्य आधारित नीति निर्माण को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि दो जिलों में उन्नत टीबी जांच शुरू करने के लिए चर्चा चल रही है। पायलट परियोजना से प्राप्त निष्कर्षों के आधार पर उन्नत जांच तकनीकों को व्यापक स्तर पर लागू करने की संभावनाओं का आकलन किया जा सकेगा।

सम्मेलन में विशेषज्ञों ने टीबी निगरानी, निदान, परिचालन अनुसंधान और कार्यान्वयन विज्ञान को मजबूत करने के लिए एम्स-भुवनेश्वर, ओडिशा सरकार, एनटीईपी, शोध संस्थानों, विकास साझेदारों और जन स्वास्थ्य एजेंसियों के बीच एक मजबूत सहयोगात्मक ढांचा तैयार करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

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