भुवनेश्वर , अगस्त 28 -- ओडिशा सरकार राज्य की समृद्ध बौद्ध विरासत को वैश्विक पटल पर बढ़ावा देने के उद्देश्य से जाजपुर जिले के उदयगिरि बौद्ध स्थल पर 'दूसरे बुद्ध' कहे जाने वाले गुरु पद्मसंभव की 45 फीट ऊंची भव्य मूर्ति स्थापित करने की योजना पर काम कर रही है।
इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य ओडिशा की समृद्ध बौद्ध विरासत को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देना और राज्य के 'बौद्ध हीरा त्रिकोण' सर्किट को मजबूत करना है। इस सर्किट में रत्नागिरी, उदयगिरि और ललितगिरि जैसे ऐतिहासिक बौद्ध स्थल शामिल हैं। ये तीनों स्थल अपने प्राचीन मठों, स्तूपों, मूर्तियों और पुरातात्विक अवशेषों के लिए जाने जाते हैं और बौद्ध शिक्षा व वज्रयान परंपरा के एक बड़े केंद्र के रूप में ओडिशा के महत्व को दर्शाते हैं। यह भव्य मूर्ति उदयगिरि की तलहटी में बडाचना के गोपालपुर पंचायत के अंतर्गत गजेंद्रपुर में शनिचक के पास लगाई जाएगी। उल्लेखनीय है कि जाजपुर जिला प्रशासन द्वारा चुने गए माझीपाड़ा गांव की एक मूर्तिकला कार्यशाला में इसका निर्माण कार्य पहले ही शुरू हो चुका है।
इस परियोजना पर राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित मूर्तिकार कलामणि रत्नाकर महारणा की देखरेख में लगभग 15 मूर्तिकार काम कर रहे हैं, जिनमें मशहूर पत्थर कलाकार प्रमोद कुमार महारणा भी शामिल हैं। उल्लेखनीय है कि बौद्ध देवी-देवताओं की अन्य मूर्तियों पर भी काम शुरू हो चुका है। इस परियोजना को 'आर्यदेश सांस्कृतिक संरक्षण केंद्र' द्वारा ओडिशा पर्यटन विभाग के सहयोग और अमेरिका स्थित 'लाइट ऑफ बुद्धा धर्म फाउंडेशन इंटरनेशनल' की मदद से विकसित किया जा रहा है। जिला प्रशासन ने इसके लिए गजेंद्रपुर-उदयगिरि बौद्ध परिसर के पास लगभग 1.5 एकड़ जमीन उपलब्ध कराई है।
इस परियोजना की अनुमानित लागत 3 करोड़ रुपये है और इसे तीन साल के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
मुख्य मूर्ति वाराणसी से लाए गए चुनार पत्थर से बनाई जाएगी। इसके चारों ओर बौद्ध देवी-देवताओं- तारा, वज्रपाणि, अवलोकितेश्वर, अमिताभ, वज्रसत्त्व, मंजुश्री और पद्मपाणि की पांच-पांच फीट ऊंची सात मूर्तियां लगाई जाएंगी। ये मूर्तियां बालासोर जिले के नीलगिरि से लाए गए काले मुगुनी पत्थर से बनाई जाएंगी। इस काम के लिए ललितगिरि, सुखुआपाडा और कोणार्क के कुशल पत्थर कारीगरों को लगाया गया है और पर्यटन विभाग ने मूर्तिकारों को गुरु पद्मसंभव की एक रेफरेंस इमेज (संदर्भ के लिए तस्वीर) भी दी है।
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