भुवनेश्वर , मई 20 -- ओडिशा की मुख्य सचिव अनु गर्ग ने जिलाधिकारियों के साथ एक ऑनलाइन बैठक में राज्य के आर्थिक विकास को तेज करने के लिए जमा रकम के मुकाबले ऋण देने के अनुपात को सुधारने पर जोर दिया है। इस बैठक में 'क्रेडिट-डिपॉजिट (सीडी) रेशियो' यानी जमा रकम के मुकाबले लोन देने के अनुपात को सुधारने पर सबसे ज्यादा जोर दिया।

यहाँ लोक सेवा भवन में बुधवार को हुई इस बैठक में वित्त, उद्योग, स्वास्थ्य, महिला एवं बाल विकास, जल संसाधन, बिजली, आबकारी और आपदा प्रबंधन विभागों के कामकाज की समीक्षा की गई। इसके साथ ही 'सीएम-संपदा' प्लेटफॉर्म के जरिए खनन से प्रभावित इलाकों में चल रहे विकास कार्यों की भी निगरानी की गई।

ज्यादा से ज्यादा लोगों को बैंकिंग से जोड़ने और ऋण की सुविधा बढ़ाने की बात कहते हुए मुख्य सचिव ने जिलाधिकारियों को निर्देश दिया कि वे बैंकों और जिला स्तर की एजेंसियों के साथ मिलकर काम करें ताकि खेती, इससे जुड़े अन्य कामों और छोटे उद्योगों को आसानी से ऋण मिल सके। उन्होंने जिलाधिकारियों से यह भी कहा कि वे प्रशासनिक और विकास से जुड़े कामों को तेजी से निपटाने के लिए जिले के अधिकारियों के साथ हर महीने नियम से बैठकें करें।

समीक्षा के दौरान वित्त विभाग के प्रधान सचिव संजीव कुमार मिश्रा ने बताया कि ओडिशा का कुल ऋण-जमा (सीडी) अनुपात इस समय 71.31 प्रतिशत है। ऋण बांटने और आर्थिक तरक्की के मामले में झारसुगुड़ा, कालाहांडी, जाजपुर और बौद्ध जैसे जिलों का प्रदर्शन काफी अच्छा रहा है।

बैठक में जरूरी क्षेत्रों को अधिक कर्ज देने और सरकारी ऋण योजनाओं की लगातार निगरानी करने की जरूरत बताई गई। अधिकारियों ने बैंकिंग पहुंच बढ़ाने और सबको साथ लेकर आर्थिक विकास करने के लिए बैंकों, जिला प्रशासन, रिजर्व बैंक (आरबीआई) और राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) के बीच बेहतर तालमेल पर चर्चा की।

बैठक का एक बड़ा हिस्सा खनन प्रभावित इलाकों के विकास के लिए बने 'सीएम-संपदा' प्लेटफॉर्म पर केंद्रित रहा। अधिकारियों ने यहाँ विकास के लिए चार-स्तरीय रणनीति की समीक्षा की। इसमें सरकारी योजनाओं को पूरी तरह लागू करना, अतिरिक्त मदद देना, नई पहल करना और जिला खनिज फाउंडेशन के चल रहे परियोजनाओं की निगरानी करना शामिल है। जिलाधिकारियों को निर्देश दिए गए कि वे जिला स्तर की समीक्षा के नतीजों को सीएम-संपदा डैशबोर्ड पर अपलोड करें और जिन मुद्दों पर राज्य सरकार की मदद चाहिए, उनकी रिपोर्ट एक हफ्ते के भीतर भेजें।

उद्योग विभाग ने जिलाधिकारियों को सलाह दी कि वे औद्योगिक बुनियादी ढांचा विकास निगम और जिला उद्योग संवर्धन एजेंसियों के साथ मिलकर फैक्ट्रियों या उद्योगों के लिए जमीन की पहचान और अधिग्रहण का काम तेज करें। बैठक में पर्यटन के ढांचे को सुधारने और रोजगार बढ़ाने पर भी बातचीत हुई।

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