भुवनेश्वर , जून 05 -- ओडिशा के उपमुख्यमंत्री कनक वर्धन सिंह देव ने शुक्रवार को राज्य में कृषि को अधिक लाभदायक, लचीला और टिकाऊ बनाने के लिए फसल विविधीकरण और आधुनिक कृषि पद्धतियों को अपनाने का आह्वान किया। इसके साथ ही उन्होंने राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में ओडिशा के आमों की एक विशिष्ट पहचान बनाने की आवश्यकता पर भी विशेष बल दिया।
भुवनेश्वर के केंद्रीय बागवानी प्रयोग केंद्र में आयोजित राज्य स्तरीय आम महोत्सव को संबोधित करते हुए श्री देव ने कहा कि ओडिशा को किसानों की आय बढ़ाने और घरेलू एवं वैश्विक बाजारों में अपनी उपस्थिति मजबूत करने के लिए अपनी समृद्ध बागवानी विविधता का लाभ उठाना चाहिए। भारतीय बागवानी अनुसंधान संस्थान और ओडिशा के बागवानी निदेशालय द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित इस महोत्सव में जहां एक तरफ राज्य की आम विरासत का जश्न मनाया गया, वहीं दूसरी तरफ "खेत बचाओ अभियान" के तहत जैव विविधता संरक्षण, जलवायु-अनुकूल बागवानी और कृषि भूमि संरक्षण को बढ़ावा दिया गया। इस कार्यक्रम में राज्य भर से सैकड़ों किसानों, वैज्ञानिकों, उद्यमियों और आम प्रेमियों ने भाग लिया।
पारंपरिक फसल चक्र से आगे बढ़ने के महत्व पर जोर देते हुए उपमुख्यमंत्री ने किसानों को दलहन, तिलहन और ड्रैगन फ्रूट जैसी उच्च मूल्य वाली फलों की फसलों की ओर रुख करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने इन फसलों की बढ़ती बाजार मांग के साथ-साथ इनके पोषण और औषधीय लाभों का भी हवाला दिया। उन्होंने राज्य सरकार की उन कई पहलों पर भी प्रकाश डाला जिनका उद्देश्य ओडिशा के किसानों को देश भर के सफल कृषि मॉडलों और सर्वोत्तम प्रथाओं से रूबरू कराना है।
किसानों और वैज्ञानिकों के बीच सीधे संवाद की सुविधा प्रदान करने के लिए आयोजकों की सराहना करते हुए श्री देव ने कहा, "ओडिशा के आमों की एक अनूठी पहचान बनने से बाजार में नए अवसर खुल सकते हैं, निर्यात को बढ़ावा मिल सकता है और उत्पादकों के लिए बेहतर रिटर्न सुनिश्चित हो सकता है।"भारतीय बागवानी अनुसंधान संस्थान के निदेशक तुषार कांति बेहेरा ने संस्थान द्वारा विकसित कई उच्च उपज देने वाली और जलवायु-अनुकूल फलों के किस्मों की प्रदर्शनी लगायी, जो बागों की उत्पादकता और लाभप्रदता में उल्लेखनीय सुधार कर सकती हैं।
इस महोत्सव का एक मुख्य आकर्षण एक भव्य प्रदर्शनी थी, जिसमें देशी प्रजातियों, मियाज़ाकी जैसी प्रीमियम विदेशी किस्मों और उच्च उपज देने वाले 'अर्क हाइब्रिड्स' सहित आम की 60 से अधिक किस्मों को प्रदर्शित किया गया था। वैज्ञानिकों ने सीधे किसानों से बातचीत कर उन्हें बाग प्रबंधन, कीट एवं रोग नियंत्रण और उन्नत खेती के तरीकों पर मार्गदर्शन दिया।
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