भुवनेश्वर , जून 17 -- ओडिशा कांग्रेस की अध्यक्ष भक्त चरण दास ने नयी शुरू की गयी स्कूली पाठ्यपुस्तकों में कथित तौर पर बड़े पैमाने पर हुई गलतियों को लेकर राज्य के स्कूल और जनशिक्षा मंत्री से सार्वजनिक माफी की मांग की है।
श्री दास ने यहां जारी एक बयान में इस मुद्दे को शिक्षा व्यवस्था के लिए एक गंभीर झटका बताते हुए आरोप लगाया कि पहली से आठवीं कक्षा की पाठ्यपुस्तकों में कम से कम 1,678 गलतियां और तथ्यात्मक अशुद्धियां हैं। उन्होंने इस घटनाक्रम को 'राज्य की शिक्षा प्रणाली का मज़ाक' करार दिया और कहा कि यह ओडिशा के इतिहास, भूगोल और सांस्कृतिक पहचान का अपमान है। ये पाठ्यपुस्तकें राष्ट्रीय शिक्षा नीति और ओडिशा स्कूली शिक्षा पाठ्यचर्या रूपरेखा-2025 के दायरे के तहत राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद, ओडिशा द्वारा तैयार की गयी थीं। इसके बाद सरकार द्वारा जारी की गयी शुद्धिपत्र सूची का हवाला देते हुए, श्री दास ने दावा किया कि आठवीं कक्षा की पाठ्यपुस्तकें सबसे अधिक प्रभावित थीं, जिनमें 705 गलतियाँ पाई गयीं। ओडिशा कांग्रेस प्रमुख ने आरोप लगाया कि 'ओड़िआ अस्मिता' को बनाये रखने के वादों के साथ सत्ता में आने के बावजूद, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार अब छात्रों को गलत ऐतिहासिक और भौगोलिक सामग्री पढ़ाये जाने की अनुमति दे रही है।
श्री दास ने सवाल किया, "यह कोई साधारण छपाई की त्रुटि नहीं है बल्कि प्रशासनिक विफलता का प्रतिबिंब है। कोई सरकार अपनी ही राज्य विधानसभा को कर्नाटक की विधानसभा के साथ कैसे भ्रमित कर सकती है?"उन्होंने स्कूल और जनशिक्षा विभाग द्वारा त्रुटिपूर्ण पाठ्यपुस्तकों को वापस लेने और बदलने के बजाय जल्दबाजी में सुधार पुस्तिका जारी करने की भी आलोचना की।
श्री दास के अनुसार, इस घटना ने मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के नेतृत्व वाली सरकार के तहत प्रशासनिक कमियों और जवाबदेही की कमी को उजागर किया है। कांग्रेस ने पहली से आठवीं कक्षा के छात्रों के बीच वितरित सभी त्रुटिपूर्ण पाठ्यपुस्तकों को तुरंत वापस लेने, राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद की समीक्षा और अनुमोदन प्रक्रिया की उच्च स्तरीय जांच करने और पांडुलिपियों को मंजूरी देने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की। पार्टी ने मंत्री की जवाबदेही भी मांगी, जिसमें या तो स्कूल और जनशिक्षा मंत्री का इस्तीफा या सार्वजनिक माफी शामिल है।
ओडिशा कांग्रेस ने कहा कि अगर सरकार छात्रों के शैक्षणिक हितों की रक्षा के लिए जल्द से जल्द सही पाठ्यपुस्तकों को छापने और बांटने में विफल रहती है, तो वह ब्लॉक और जिला मुख्यालयों पर राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन शुरू करेगी।
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