भुवनेश्वर , अक्टूबर 19 -- ओडिशा उच्च न्यायालय ने सार्वजनिक सड़कों पर अस्थायी धार्मिक पंडाल लगाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने से इनकार करते हुए कहा है कि व्यापक जनहित में धार्मिक त्योहारों का आयोजन किया जा सकता है, बशर्ते इससे यातायात पूरी तरह बाधित न हो, स्थानीय निवासियों का अपने घरों तक पहुंचने का रास्ता बंद न हो और आपातकालीन वाहनों की आवाजाही प्रभावित न हो।

अदालत ने कहा कि सामुदायिक आयोजनों में व्यापक जनहित, व्यक्तिगत असुविधा की तुलना में अधिक महत्वपूर्ण है, बशर्ते व्यवस्थाओं के कारण यातायात पूरी तरह बाधित न हो या निवासियों को अपने घरों तक पहुंचने से वंचित न होना पड़े।

मुख्य न्यायाधीश हरीश टंडन और न्यायमूर्ति मृगांक शेखर साहू की खंडपीठ ने श्री शरत कुमार गजेंद्र की ओर से दायर जनहित याचिका (पीआईएल) का निस्तारण करते हुए यह टिप्पणी की। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि उनके घर से करीब 50 मीटर की दूरी पर गणेश पूजा या दुर्गा पूजा के लिए बनाए गए एक अस्थायी पंडाल के कारण सड़क पूरी तरह अवरुद्ध हो गई थी, जिससे उनके आवास तक पहुंचना मुश्किल हो गया था।

खंडपीठ ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत धर्म का पालन करने का अधिकार सार्वजनिक व्यवस्था, नैतिकता और स्वास्थ्य के हित में लगाए गए उचित प्रतिबंधों के अधीन है।

अदालत ने कहा कि सामुदायिक धार्मिक उत्सव देश की सांस्कृतिक परंपराओं का अभिन्न अंग हैं और केवल किसी व्यक्ति को होने वाली असुविधा के आधार पर ऐसे आयोजनों को रोकने का औचित्य नहीं बनता।

अदालत ने कहा कि राज्य सरकार ने अपने हलफनामे में बताया था कि वाहनों की आवाजाही सुगम बनाने के लिए संबंधित स्थल पर 22 फुट चौड़ा रास्ता खुला रखा जा रहा है। परमादेश जारी करने का कोई आधार नहीं मिलने पर खंडपीठ ने धार्मिक उत्सवों के आयोजन के खिलाफ हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।

हालांकि, अदालत ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि अस्थायी पंडाल लगाने की अनुमति तभी दी जाए, जब वाहनों की आवाजाही और स्थानीय निवासियों के घरों तक निर्बाध पहुंच के लिए पर्याप्त जगह सुनिश्चित हो। एंबुलेंस और दमकल गाड़ियों सहित आपातकालीन वाहनों की आवाजाही के लिए भी पर्याप्त जगह रखी जानी चाहिए।

अदालत ने अधिकारियों को निर्धारित ध्वनि सीमा और समय संबंधी प्रतिबंधों का पालन सुनिश्चित कराने तथा सार्वजनिक सड़कों पर बनाए जाने वाले अस्थायी ढांचों के कारण आवागमन में अनुचित बाधा न आने देने का भी निर्देश दिया।

जनहित याचिका का निस्तारण करते हुए खंडपीठ ने सार्वजनिक पहुंच और सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं को उठाने के लिए याचिकाकर्ता की सराहना की। अदालत ने जोर देकर कहा कि धार्मिक आयोजनों के कारण यातायात पूरी तरह बाधित नहीं होना चाहिए और न ही निवासियों को अपने घरों में आने-जाने से रोका जाना चाहिए।

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