भुवनेश्वर , मई 06 -- ओडिशा उच्च न्यायालय ने यौन अपराधों के मामलों में पीड़ितों की पहचान की सुरक्षा के लिए कुछ निर्देश जारी किए हैं।

ये निर्देश उच्चतम न्यायालय द्वारा पिछले 24 मार्च को दिए गए एक फैसले के पालन में जारी किए गए हैं। न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल ने कल इन अनिवार्य निर्देशों की जानकारी महाधिवक्ता, ओडिशा स्टेट बार काउंसिल के अध्यक्ष चेयरमैन, उच्च न्यायालय के भारत के डिप्टी सॉलिसिटर जनरल और उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन के सचिव को दी।

ये निर्देश तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं। उच्च न्यायालय ने चेतावनी दी है कि इनका किसी भी तरह से उल्लंघन करने पर उसे गंभीरता से लिया जाएगा। इन विस्तृत दिशानिर्देशों के अनुसार, वकीलों को निर्देश दिया गया है कि वे केस के शीर्षक पर या फाइलिंग के सबसे ऊपर स्पष्ट रूप से यह अंकित करें कि यह मामला पाॅक्सो अधिनियम , भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) , भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) या अन्य संबंधित कानूनों के तहत "यौन अपराध" से संबंधित है।

इससे न्यायायलय रजिस्ट्री ज़रूरी सावधानियाँ बरत पाएगी और अनजाने में जानकारी लीक होने से रोक पाएगी। इसी तरह, स्टैम्प रिपोर्टर्स को भी निर्देश दिया गया कि वे याचिकाओं, हलफ़नामों, अनुलग्नकों या संबंधित दस्तावेज़ों में पीड़ित की पहचान ( जिसमें नाम, पता या अन्य पहचान संबंधी विवरण शामिल हैं ) के किसी भी खुलासे को एक कमी के तौर पर देखें।

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