भुवनेश्वर , अगस्त 27 -- ओडिशा उच्च न्यायालय ने ओडिशा के पूर्व पुलिस महानिदेशक योगेश बहादुर खुराना के खिलाफ़ अवमानना की कार्यवाही शुरू की है। उन पर महिला उप निरीक्षक सागरिका परिदा को नौकरी पर बहाल करने के न्यायालय के आदेश की जानबूझकर और स्पष्ट रूप से अनदेखी करने का आरोप है। सागरिका को कथित रूप से अपने आपराधिक रिकॉर्ड को छिपाने के कारण नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया था।

न्यायमूर्ति संजय कुमार मिश्रा ने परिदा द्वारा दायर अवमानना याचिका की सुनवाई की और उन्होंने श्री खुरानिया के खिलाफ कार्यवाही बंद करने की राज्य की उस दलील को खारिज कर दिया कि वह 16 अगस्त, 2026 को सेवानिवृत्त हो गए थे।

न्यायालय ने कहा कि श्री खुरानिया के सेवानिवृत्त होने के बावजूद भी उनके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही जारी रह सकती है और आदेश का पालन न करने के लिए जिम्मेदार मौजूदा अधिकारी और अन्य अधिकारियों के खिलाफ भी कार्यवाही की जा सकती है।

न्यायालय ने कहा कि श्री खुरानिया की ओर से राज्य के वकील द्वारा समय-समय पर आश्वासन दिए गए थे और इस मामले में दाखिल किए गए हलफनामे कथित तौर पर भ्रामक थे। अदालत ने प्रथम दृष्टया में पाया कि यह मामला उसके आदेश की स्पष्ट रूप से जानबूझकर अवहेलना करने से जुड़ा है जिसके कारण अवमानना न्यायालय अधिनियम, 1971 की धारा 11 और 12 के तहत कार्रवाई उचित है।

तदनुसार, न्यायालय ने अपने कार्यालय को पुलिस महानिरीक्षक (कार्मिक), ओडिशा, कटक के माध्यम से श्री खुरानिया को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया। नोटिस में उनसे यह बताने के लिए कहा गया कि उच्च न्यायालय के 25 सितंबर, 2025 के आदेश की जानबूझकर अवहेलना करने के लिए अधिनियम की धारा 12 के तहत उनके खिलाफ मुकदमा क्यों न चलाया जाए और उन्हें दंडित क्यों न किया जाए।

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