भुवनेश्वर , अगस्त 30 -- ओडिशा उच्च न्यायालय ने कटक में सड़कों की बिगड़ती हालत पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा है कि अधिकारियों के बार-बार दिए गए भरोसे और अनुपालन हलफनामों के बावजूद "गाड़ी चलाने लायक सड़कें" नहीं बन पायी हैं।
न्यायमूर्ति के.आर. महापात्रा और न्यायमूर्ति वी. नरसिंह की खंडपीठ ने शनिवार को शहर में सड़कों की मरम्मत और नवीनीकरण से जुड़े एक मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि कटक गड्ढे, मरम्मत, मॉनसून और फिर से गड्ढे के "दर्दनाक चक्र" में फंसा हुआ लगता है। खंडपीठ ने संविधान के अनुच्छेद 19(1)(डी) के तहत आवागमन की आजादी के मौलिक अधिकार और अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का ज़िक्र करते हुए कहा, "सड़क सिर्फ़ तारकोल और पत्थर नहीं होती। यह एक जीवन रेखा होती है।
न्यायालय ने इस मामले की सुनवाई से पहले वरिष्ठ अधिकारियों को अदालत में पेश होने का निर्देश दिया था। आवास एवं शहरी विकास विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव उषा पाधी और कटक नगर निगम (सीएमसी) की आयुक्त किरणदीप कौर सहोता वर्चुअल तरीके से न्यायालय के सामने पेश हुईं।
सुश्री पाधी ने अदालत को भरोसा दिलाया कि कटक में सड़कों के निर्माण, रखरखाव और मरम्मत के लिए ज़रूरी कदम उठाए जाएंगे और इसके लिए एक व्यापक योजना तैयार की जा रही है। उन्होंने खंडपीठ को यह भी बताया कि बारिश के मौसम में अलग-अलग जगहों पर जल-जमाव की समस्या से निपटने और पानी की निकासी व्यवस्था के लिए एक प्रभावी व्यापक परियोजना रिपोर्ट तैयार की जा रही है।
अदालत ने अतिरिक्त मुख्य सचिव को सात दिनों के भीतर हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया।सीएमसी आयुक्त एवं सीडीए की उपाध्यक्ष ने कहा कि सीडीए सेक्टर-13 की सड़कें निर्माण और मरम्मत का काम पूरा होने के बाद रखरखाव के लिए सीएमसी को सौंप दी जाएंगी।
निगम के वकील ने दावा किया कि शहर की 70 प्रतिशत मुख्य सड़कें अच्छी हालत में हैं। हालांकि खंडपीठ ने कहा कि अलग-अलग वार्डों की एडवोकेट्स कमेटियों के सदस्यों द्वारा जताई गई चिंताओं को देखते हुए इस दावे को स्वीकार करना मुश्किल है।
उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता सामंतराय ने कहा कि अधिवक्ताओं की कमेटियां अपने-अपने वार्डों में सड़कों का निरीक्षण करेंगी और सात दिनों के भीतर मुख्य सड़कों की हालत पर व्यापक रिपोर्ट सौंपेंगी। इस मामले की अगली सुनवाई 10 सितंबर को तय की गई।
खंडपीठ ने आखिरी और अहम टिप्पणी में कहा कि उसे उम्मीद है कि सरकार के दिए गए आश्वासन सिर्फ़ हलफ़नामों और अनुपालन रिपोर्ट तक ही सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि वे असल में पूरे होंगे और कटक की सड़कों पर साफ़ तौर पर सुधार लाएंगे।
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