भुवनेश्वर , अक्टूबर 04 -- ओडिशा उच्च न्यायालय ने एक वरिष्ठ अधिकारी की समय पूर्व सेवानिवृत्ति के सरकारी आदेश को रद्द कर दिया है। न्यायालय ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि अधिकारी को उनकी सामान्य सेवानिवृत्ति की तिथि तक सेवा में माना जाए और उसी के अनुसार सभी परिणामी सेवानिवृत्ति लाभ प्रदान किए जाएं।

राज्य सरकार के समय पूर्व सेवानिवृत्ति के आदेश को खारिज करते हुए उच्च न्यायालय ने माना कि सरकार तय तिथि (सुपरअन्युएशन) से महज चार महीने पहले अधिकारी को सेवानिवृत्त करते समय अनिवार्य सेवा संहिता दिशानिर्देशों का पालन करने में विफल रही। न्यायमूर्ति बिराजा प्रसन्न सतपथी की एकल पीठ ने सरकार को निर्देश दिया कि अधिकारी को 31 जनवरी 2021 को उनकी सामान्य सेवानिवृत्ति की तिथि तक सेवा में निरंतर माना जाए और बीच की अवधि को काल्पनिक आधार पर नियमित करते हुए उन्हें सभी परिणामी पेंशन व सेवानिवृत्ति लाभ दिए जाएं।

मामले के विवरण के अनुसार, याचिकाकर्ता फरवरी 1987 में ओएएएस-द्वितीय कैडर में शामिल हुए थे और 2017 में ओएएएस विशेष सचिव ग्रेड के पद तक पहुंचे थे। जब वह आयुष निदेशक के रूप में कार्यरत थे, तब उन्हें 9 जुलाई 2020 को भुवनेश्वर महिला थाने में दर्ज एक मामले के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था। चार दिन बाद उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया गया और गिरफ्तारी की तारीख से ही निलंबित कर दिया गया था। इसके बाद 7 अगस्त 2020 की एक आंतरिक समिति की रिपोर्ट के आधार पर, सरकार ने नियम 71(ए) के तहत उनकी तय सेवानिवृत्ति से छह महीने से भी कम समय पहले 13 अगस्त 2020 को उन्हें सेवानिवृत्त कर दिया था।

याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील एस. के. दास ने 24 सितंबर 2019 को सामान्य प्रशासन एवं लोक शिकायत विभाग द्वारा जारी दिशानिर्देशों का हवाला देते हुए इस आदेश को चुनौती दी। उन्होंने तर्क दिया कि जब उनका मामला समिति को भेजा गया था तब वह पहले ही 59 वर्ष के हो चुके थे और दिशानिर्देशों के तहत सेवानिवृत्ति में केवल चार महीने शेष रहने पर इस तरह की समय पूर्व सेवानिवृत्ति पर रोक है।

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