भुवनेश्वर , जनवरी 21 -- ओडिशा उच्च न्यायालय ने राज्य में कथित अवैध खनन गतिविधियों को लेकर राज्य सरकार को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इन गतिविधियों के कारण सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व नुकसान का आरोप लगाया गया है।

मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति हरिश टंडन और न्यायमूर्ति एम.एस. रमन की खंडपीठ ने यह नोटिस एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान जारी किया। यह याचिका श्रवण कुमार देब द्वारा दायर की गई थी। अदालत ने राज्य सरकार को दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश देते हुए मामले की अगली सुनवाई 10 फरवरी को तय की है।

याचिकाकर्ता ने राज्य में बड़े पैमाने पर खनन लूट का आरोप लगाते हुए कहा कि उच्चतम न्यायालय के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद राज्य सरकार उनका सख्ती से पालन नहीं कर रही है। याचिका में यह भी उल्लेख किया गया कि संविधान पीठ ने ओडिशा में अवैध खनन पर गंभीर चिंता जताई थी, लेकिन इसके बावजूद राज्य सरकार ने इस दिशा में पर्याप्त कदम नहीं उठाए।

याचिका में कहा गया कि उच्चतम न्यायालय ने अवैध खनन में शामिल खननकर्ताओं पर 100 प्रतिशत जुर्माना लगाए जाने का निर्देश दिया है और इससे बचने का कोई रास्ता नहीं है।

खंडपीठ ने आदेश में कहा, "चूंकि इस रिट याचिका में गंभीर प्रश्न उठाए गए हैं, इसलिए हम राज्य सरकार को अवैध खनन से जुड़े सभी तथ्यों और इस संबंध में उठाए गए कदमों का खुलासा करते हुए हलफनामा दाखिल करने की अनुमति देते हैं।"गौरतलब है कि उच्चतम न्यायालय द्वारा वर्ष 2014 में गठित केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (सीईसी) ने ओडिशा के खनन क्षेत्र में गंभीर खामियों का खुलासा किया था। समिति की रिपोर्ट के अनुसार, 187 में से 102 लौह एवं मैंगनीज अयस्क खनन पट्टाधारकों के पास आवश्यक पर्यावरणीय मंजूरियां नहीं थीं। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि बिना पर्यावरण स्वीकृति के 2,155 लाख मीट्रिक टन लौह और मैंगनीज अयस्क का उत्खनन किया गया।

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