भुवनेश्वर , अक्टूबर 31 -- ओडिशा के जगतसिंहपुर जिले में न्यायपालिका की संवेदनशीलता और मानवीय दृष्टिकोण का एक अनूठा मामला सामने आया है। यहां एक महिला जज ने तीन मंजिला अदालत भवन की ऊपरी मंजिल तक न पहुंच पाने वाले एक दिव्यांग आरोपी का बयान दर्ज करने के लिए खुद अपने कक्ष से नीचे उतरकर परिसर में आने का सराहनीय कदम उठाया।
आरोपी की पहचान जगतसिंहपुर थाना क्षेत्र के सिंगीपुर गांव निवासी 50 वर्षीय विष्णु साहू के रूप में हुई है। साहू और उनकी पत्नी के खिलाफ 2018 में थाने में आपराधिक मामले दर्ज किए गए थे, जिनकी सुनवाई पिछले आठ वर्षों से लंबित है। विष्णु साहू लकवा और अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से पीड़ित हैं, जिसके कारण वे नियमित रूप से अदालत में पेश नहीं हो पा रहे थे।
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 351 के तहत, किसी भी जांच या ट्रायल के दौरान अदालत के लिए यह अनिवार्य है कि वह आरोपी से व्यक्तिगत रूप से पूछताछ करे, ताकि उसे अपने खिलाफ सामने आ रही परिस्थितियों को स्पष्ट करने का अवसर मिल सके।
जब विष्णु साहू गुरुवार को अदालत पहुंचे, तो वह शारीरिक अक्षमता के कारण सीढ़ियां चढ़कर ऊपर नहीं जा सके। इस पर उनके वकील बीरबर बारीक ने द्वितीय श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रियंका दास को उनकी स्वास्थ्य स्थिति और आवाजाही में आ रही कठिनाइयों से अवगत कराया। स्थिति की गंभीरता को समझते हुए, जज ने दोनों आरोपियों को ऊपर बुलाने के बजाय खुद नीचे आकर अदालत परिसर में उनके बयान दर्ज करने का निर्णय लिया।
न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रियंका दास अपने कक्ष से नीचे आईं और बचाव पक्ष के वकील तथा सहायक लोक अभियोजक प्रह्लाद नायक की मौजूदगी में दोनों आरोपियों के बयान दर्ज किए।
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