बेंगलुरु , जुलाई 20 -- कांग्रेस की कर्नाटक इकाई के अध्यक्ष बी.के. हरिप्रसाद ने सोमवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के उस दावे पर सवाल उठाया जिसमें कहा गया था कि उसे सरकारी धन नहीं मिलता है।

उन्होंने एक मीडिया रिपोर्ट का हवाला दिया जिसमें आरोप लगाया गया है कि सरकारी स्वामित्व वाली तेल और प्राकृतिक गैस निगम (ओएनजीसी) ने पिछले 10 सालों में संघ से जुड़े 20 संगठनों को अपने कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) कोष से 668 करोड़ रुपये से अधिक की राशि दी है।

श्री हरिप्रसाद ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि ओएनजीसी के सीएसआर के इस कथित आवंटन ने उन बार-बार लगने वाले आरोपों की कड़ी को और बढ़ा दिया है, जिसमें कहा जाता रहा है कि मंदिर के चढ़ावे, आपदा राहत कोष, कोविड-19 राहत कोष, सरकारी जमीन जैसे संसाधनों को संघ के संगठनों को दिया गया है।

कांग्रेस नेता ने सवाल किया, "फिर भी संघ का दावा है कि वह सरकारी धन नहीं लेता है। अगर सरकारी संस्थान और करदाताओं के पैसे से चलने वाले संसाधन आपके संगठनों को धन दे रहे हैं, तो संघ सरकारी पैसे से स्वतंत्र होने का दावा कैसे कर सकता है?"श्री हरिप्रसाद ने तर्क दिया कि यह मामला अब केवल संघ के एक पंजीकृत संगठन न होने की बहस से आगे निकल चुका है और यह पूरी तरह पारदर्शिता, जवाबदेही तथा करदाताओं के पैसे के इस्तेमाल को जानने के जनता के अधिकार का बन गया है। उन्होंने कहा, "मुद्दा अब केवल पंजीकरण का नहीं है; यह पारदर्शिता, जवाबदेही और नागरिकों का यह जानने का अधिकार है कि सार्वजनिक धन कैसे खर्च किया जा रहा है।"कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने अधिक खुलासे की मांग करते हुए कहा कि संघ को 'अपने धन के स्रोतों के बारे में और सवालों से नहीं बचना चाहिए।' उन्होंने इस बात पर स्पष्टीकरण मांगा कि क्या एक अपंजीकृत संगठन और उससे जुड़े संगठनों के लिए सरकारी संस्थानों से धन प्राप्त करना नैतिक रूप से सही है।

श्री हरिप्रसाद की यह टिप्पणी उस मीडिया रिपोर्ट के बाद आई है जिसमें आरोप लगाया गया है कि ओएनजीसी ने अपने सीएसआर कार्यक्रम के माध्यम से पिछले 10 वर्षों में संघ से जुड़े 20 संगठनों को 668 करोड़ रुपये से अधिक का दान दिया है।

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