फगवाड़ा , सितंबर 04 -- ऑस्ट्रेलिया में रोजगार और बेहतर भविष्य का सपना दिखाकर विदेश भेजे गये पंजाब के 33 और राजस्थान के एक युवक के पिछले करीब पांच-छह महीने से दक्षिण-पूर्व एशियाई देश तिमोर-लेस्ते की राजधानी दिली में फंसे होने का मामला सामने आया है। पीड़ित परिवारों ने राज्यसभा सदस्य एवं पद्मश्री संत बलबीर सिंह सीचेवाल से युवकों की सुरक्षित भारत वापसी के लिए मदद की गुहार लगायी है।
पीड़ित आठ परिवार शुक्रवार को सुल्तानपुर लोधी स्थित निर्मल कुटिया पहुंचे और वीडियो कॉल के जरिए इंग्लैंड में मौजूद संत सीचेवाल से संपर्क किया। संत सीचेवाल ने वहां से विदेश मंत्रालय से संपर्क कर युवकों की वापसी के प्रयास शुरू किये। परिवारों के अनुसार, एजेंटों ने उनके बच्चों को ऑस्ट्रेलिया में नौकरी दिलाने का भरोसा देकर कथित तौर पर प्रत्येक परिवार से पांच से 11 लाख रुपये तक लिए। परिवारों का दावा है कि युवकों को ऑस्ट्रेलिया भेजने के नाम पर करीब तीन करोड़ रुपये की रकम जुटाई गई। इसके लिए कई परिवारों ने मकान, जमीन और गहने गिरवी रखकर तथा कर्ज लेकर पैसे जुटाये।
परिवारों ने बताया कि युवकों को भारत के अलग-अलग हवाई अड्डों से रवाना किया गया और दो से छह दिन की यात्रा के बाद उन्हें बाली तथा मलेशिया के रास्ते तिमोर-लेस्ते पहुंचाया गया। वहां कथित तौर पर एजेंटों ने युवकों को बाघापुराना निवासी विजय नामक व्यक्ति के हवाले कर दिया और उनके पासपोर्ट अपने कब्जे में ले लिए। पीड़ित परिवारों ने आरोप लगाया कि युवकों को वहां बंधक बनाकर रखा गया तथा धमकाया गया। उनसे कथित तौर पर उनकी इच्छा के विरुद्ध काम करवाया गया, मजदूरी नहीं दी गयी और पर्याप्त भोजन भी उपलब्ध नहीं कराया गया। परिवारों के अनुसार, युवकों ने सामूहिक रूप से विरोध किया तो उनके पासपोर्ट वापस किये गये। बाद में स्थानीय पुलिस ने विजय नामक व्यक्ति को हिरासत में ले लिया।
बताया गया है कि करीब 10 युवक अपने प्रयासों और खर्चे पर भारत लौटने में सफल रहे हैं, जबकि 34 युवक अभी भी तिमोर-लेस्ते में फंसे हुए हैं। इनमें मोगा के आठ, जालंधर के सात, फिरोजपुर के छह, लुधियाना के पांच, फाजिल्का के दो तथा तरनतारन, कपूरथला, पटियाला और जलालाबाद के एक-एक युवक शामिल हैं। इनमें एक युवक राजस्थान का बताया गया है।
जालंधर निवासी संदीप सिंह और राजप्रीत सिंह ने बताया कि वे 10 अन्य युवकों के साथ काफी संघर्ष के बाद भारत लौटे। उन्होंने आरोप लगाया कि पासपोर्ट अपने कब्जे में लेने के बाद उन्हें धमकाया गया और इच्छा के विरुद्ध काम करने के लिए मजबूर किया गया। उनके अनुसार, काम करने के बावजूद उन्हें मजदूरी नहीं दी गई और कई बार बेहद कम भोजन पर गुजारा करना पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें लगभग बंधक बनाकर रखा गया था। पीड़ित युवकों ने दावा किया कि विजय इससे पहले भी कई अन्य युवकों को इसी स्थान पर कथित तौर पर बंधक बनाकर रख चुका था।
मामला तब सामने आया जब तिमोर-लेस्ते में फंसे युवकों ने वीडियो जारी कर संत बलबीर सिंह सीचेवाल से उन्हें सुरक्षित भारत वापस लाने में मदद की अपील की।
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