पटना , जून 01 -- ारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) ने बिहार भूमि निबंधन नियमावली में किए गए संशोधनों को जटिल और जनविरोधी बताते हुए राज्य सरकार से ई-निबंधन पोर्टल पर अनिवार्य 13 प्रकार की जानकारियों की बाध्यता को सरल करने और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए ऑफलाइन निबंधन की वैकल्पिक व्यवस्था बहाल करने की मांग की है। भाकपा के राज्य सचिव रामनरेश पाण्डेय ने आज बयान जारी कर कहा कि राज्य सरकार द्वारा भूमि निबंधन प्रक्रिया में किए गए बदलाव से आम जनता, विशेषकर छोटे किसान, भूमिहीन, महिला और ग्रामीण क्रेता-विक्रेता गंभीर कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं।

श्री पाण्डेय ने कहा कि ई-निबंधन पोर्टल पर भू-नक्शा, खाता-खेसरा, दाखिल- खारिज, आधार-पैन लिंकिंग, बैंक विवरण और स्वघोषणा पत्र सहित 13 प्रकार की जानकारियाँ अनिवार्य किए जाने से प्रक्रिया अत्यधिक जटिल हो गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार का यह कदम व्यवहारिक रूप से पारदर्शिता बढ़ाने के बजाय लोगों को दलालों और साइबर कैफे पर निर्भर बना रहा है, जिससे भ्रष्टाचार और अतिरिक्त खर्च बढ़ रहा है।

भाकपा नेता ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल संसाधनों और तकनीकी जानकारी के अभाव के कारण लोग भूमि निबंधन की प्रक्रिया पूरी करने में असमर्थ हो रहे हैं। छोटे और सीमांत किसानों के पुराने दस्तावेज अधूरे रहने या खो जाने से भी समस्याएँ बढ़ी हैं।उन्होंने कहा कि भूमि की खरीद-बिक्री प्रभावित होने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह व्यवस्था आम जनता को परेशान करने और भूमि पर बड़े भू-कारोबारी प्रभाव बढ़ाने की दिशा में उठाया गया कदम प्रतीत होती है।

भाकपा ने सरकार से मांग की है कि ई-निबंधन प्रक्रिया को सरल बनाया जाए, छोटे किसानों को राहत दी जाए, प्रखंड और अंचल स्तर पर निःशुल्क सहायता केंद्र स्थापित किए जाएं तथा ग्रामीण क्षेत्रों के लिए ऑफलाइन निबंधन की वैकल्पिक व्यवस्था तत्काल बहाल की जाए।

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