नयी दिल्ली , मई 29 -- रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर को अंजाम देने वाले अधिकारियों ,सैनिकों, नौसैनिकों और वायु सैनिकों के व्यक्तिगत अनुभवों को बयां करने वाली स्मारक पुस्तक का शुक्रवार को यहां विमोचन किया।
बाद में श्री सिंह ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि यह पुस्तक ऑपरेशन सिंदूर को अंजाम देने वालों को श्रद्धांजलि और सैनिकों के समर्पण तथा साहस का प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि यह पुस्तक ऑपरेशन सिंदूर में भाग लेने वाले 100 अधिकारियों, नौसैनिकों, वायुसैनिकों और बहादुर सैनिकों के व्यक्तिगत अनुभवों और अहसासों को समेटे हुए है। रक्षा मंत्री ने कहा, "लोगों को इस पुस्तक से प्रेरणा लेकर राष्ट्र की सुरक्षा सुनिश्चित करने और संप्रभुता बनाए रखने के लिए किए गए बलिदान को समझना चाहिए।"उन्होंने इस ऑपरेशन को अभूतपूर्व बताते हुए कहा कि भारत ने पाकिस्तान को चार दिनों में ही युद्धविराम के लिए बाध्य कर दिया। यह आधुनिक युद्ध के मानवीय पहलू की भी जानकारी देती है, जहां नेतृत्व, साहस, दबाव में निर्णय लेने की क्षमता और प्रतिबद्धता ने रणनीति को सफलता में बदल दिया।
रक्षा मंत्री ने कहा कि यह पुस्तक आधिकारिक सैन्य इतिहास लेखन परंपराओं से हटकर लिखी गई है। युद्ध के अधिकांश वृत्तांत मुख्यालय और ऑपरेशन रूम के दृष्टिकोण को प्राथमिकता देते हैं, जहां कमांडरों के निर्णयों को दर्ज किया जाता है, उनका विश्लेषण किया जाता है और उन पर बहस की जाती है। इनमें युद्ध का वास्तविक स्वरूप, जैसा कि नियंत्रण रेखा पर दुश्मन के बंकरों को निशाना बनाते सैनिक, हवाई रक्षा संचालक जो आने वाले ड्रोनों का पता लगाकर उन्हें निष्क्रिय कर रहा था, हथियार से मार करने के समय कॉकपिट में बैठा पायलट और बेड़े के उच्चतर स्थिति में आने पर कार्रवाई स्टेशनों पर तैनात नौसैनिक के अनुभव लगभग अकथ्य रह जाते हैं। यह पुस्तक उसी स्वरूप को पाठकों के समक्ष लाने का प्रयास है।
इसमें तीनों सेनाओं के साथ-साथ मुख्यालय, एकीकृत रक्षा स्टाफ के वृत्तांत, युद्धक विमान चालक, नौसेना के चौकसकर्मी, सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल के दल, विशेष बल के संचालक, सिग्नलर, लॉजिस्टिक्स कर्मी, चिकित्सा अधिकारी और संयुक्त एवं एकीकृत संगठनों के कर्मी सम्मिलित हैं जो इस अभियान में एक साथ शामिल रहे हैं।
इस अवसर पर प्रमुख रक्षा अध्यक्ष जनरल अनिल चौहान, नौ सेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी, सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी और वायु सेना प्रमुख एयर मार्शल एपी सिंह भी मौजूद थे।
प्रमुख रक्षा अध्यक्ष के मार्गदर्शन में संकलित इस पुस्तक में सामरिक संचार महानिदेशालय, मीडिया एवं जन सूचना प्रकोष्ठ तथा मीडिया एवं जनसंपर्क निदेशालय के व्यक्तिगत अनुभव शामिल हैं जबकि यूनाइटेड सर्विस इंस्टीट्यूशन ऑफ इंडिया ने इसके प्रकाशन में सहयोग किया है।
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