मुंबई , मई 27 -- महाराष्ट्र में मुंबई अपराध शाखा ने विभिन्न ऑनलाइन मोबाइल एप से कर्ज बांटने के बाद उसकी वसूली में मिली उत्पीड़न की शिकायतों के बाद छह लोगों को गिरफ्तार किया है।

पुलिस ने इन अभियुक्तों को अदालत में पेश किया, जहां उन्हें 30 मई तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया। इस मामले में इन छह व्यक्तियों को ऋण वसूली के सिलसिले में एक बैंक कर्मचारी अक्षय सिंह और उसके परिवार को कथित तौर पर धमकाने और प्रताड़ित करने के आरोप में गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान नारायण गोरीवाले, पांडुरंग जाधव, सुखदेव थोराट, चंद्रकांत वाघमारे, मदनलाल जायसवाल और वाल्मीकि गेनालाल गुप्ता के रूप में हुई है।

शिकायत के अनुसार, श्री सिंह ने पिछले साल अप्रैल में अठारह अलग-अलग ऑनलाइन मोबाइल कर्ज एप्लिकेशनों से सात लाख पांच हजार रुपये का ऋण लिया था। उन्होंने आरोप लगाया कि अब तक कुल 17 लाख 60 साठ हजार रुपये चुकाने के बावजूद, एप्लिकेशनों में अभी भी 10 लाख आठ हजार रुपये की बकाया राशि दिखाई जा रही थी। शिकायतकर्ता ने आगे आरोप लगाया कि आरोपियों ने बार-बार उनसे, उनके परिवार के सदस्यों और यहां तक कि उनके कार्यस्थल के कर्मचारियों से संपर्क किया, जिससे उन्हें गंभीर मानसिक पीड़ा हुई। उन्होंने दावा किया कि आरोपी अक्सर उनके कार्यालय आते थे, और भुगतान की मांग को लेकर उन्हें रोजाना धमकाते थे।

लगातार हो रहे उत्पीड़न के बाद उन्होंने पुलिस से संपर्क कर शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में कहा गया है कि ऑनलाइन ऋण एप्लिकेशनों ने कथित तौर पर उनके मोबाइल फोन में संग्रहीत डेटा तक पहुंच प्राप्त कर ली और उनसे तथा उनके परिवार के सदस्यों से जुड़ी संवेदनशील व्यक्तिगत जानकारी निकाल ली। इस जानकारी को कथित तौर पर प्रसारित किया गया, जिसके बाद उन्हें कथित तौर पर कई धमकी भरे फोन आये।

जांचकर्ताओं ने अदालत को सूचित किया कि आरोपियों ने कथित तौर पर शिकायतकर्ता की पत्नी का मोबाइल नंबर हासिल कर लिया और उनके साथ अश्लील गाली-गलौज की। आरोपियों की ओर से पेश अधिवक्ता हितेश पटेल ने पुलिस की याचिका का विरोध किया और कहा कि यह किसी बड़ी साजिश का हिस्सा हो सकता है। शिकायतकर्ता एक बैंक कर्मचारी है और ऐसा प्रतीत होता है कि ऋण लेने के बाद अब वह इसे चुकाना नहीं चाहता। पुनर्भुगतान से बचने के लिए यह मनगढ़ंत मामला दर्ज कराया गया है। अदालत ने हालांकि अभियोजन पक्ष के अनुरोध को स्वीकार कर लिया और जांचकर्ताओं को आरोपों की विस्तार से जांच करने की अनुमति देने के लिए सभी छह आरोपियों को पुलिस हिरासत में भेज दिया।

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