चेन्नई , अक्टूबर 21 -- तमिलनाडु के जाने-माने जौहरी एवं शिल्पकार वुम्मिडी एथिराज(99) का बुधवार को निधन हो गया। वह ऐतिहासिक 'सेंगोल' (राजदंड) के शिल्पकार के रूप में बहुत प्रसिद्ध थे जिसे 1947 में भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को भेंट किया गया था।

उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और तमिलनाडु के राज्यपाल आर.वी. आर्लेकर ने उनके निधन पर शोक व्यक्त किया है।

उनकी पत्नी सुमित्रा वुम्मिडी का उनसे पहले ही निधन हो गया था। उनके परिवार में तीन बेटे विजय भारती, उदय कुमार वुम्मिडी और विजयेन्द्रन वुम्मिडी सहित पोते-पोतियां और परपोते-परपोतियां हैं।

उनके परिजनों ने बताया, "बड़े दुख के साथ हमें सूचित करना है कि हमारे प्रिय श्री वुम्मिडी एथिराज गारू का आज निधन हो गया। हम परिवार के सभी सदस्यों से अनुरोध करते हैं कि वे आज हमारे निवास पर एकत्रित हों और उनके अंतिम संस्कार में शामिल होकर उन्हें अंतिम विदाई दें। आइए, हम सब मिलकर उनके जीवन का सम्मान करें, उनकी यादों को संजोएं और उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करें।"आज शाम उनका अंतिम संस्कार किया गया। चेन्नई के मशहूर 'वुम्मिडी बंगारू ज्वेलर्स' परिवार के एक वरिष्ठ सदस्य वुम्मिडी एथिराज ने सोने की परत वाले चांदी के 'सेंगोल' के निर्माण में मदद की जो अंग्रेजों से सत्ता के हस्तांतरण का प्रतीक था। मई 2023 में जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नए भारतीय संसद भवन में सेंगोल को स्थापित किया तब इसे राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली और इसका ऐतिहासिक महत्व फिर से उजागर हुआ; इस अवसर पर एथिराज को विशेष रूप से सम्मानित भी किया गया। एथिराज का परिवार चेन्नई में आभूषण निर्माण की एक प्रतिष्ठित परंपरा से जुड़ा हुआ है।

अपने संदेश में उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने कहा, "श्री वुम्मिडी एथिराज के निधन से गहरा दुख हुआ। भारत की सभ्यतागत विरासत के पवित्र प्रतीक ऐतिहासिक सेंगोल के निर्माण में उनके प्रयासों को हमेशा सम्मान एवं कृतज्ञता के साथ याद किया जाएगा। भारत की आभूषण-कला की समृद्ध परंपरा को सहेजने में उनके अमूल्य योगदान ने एक ऐसी विरासत छोड़ी है जो हमेशा कायम रहेगी। उनके परिवार एवं प्रियजनों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं।"श्री मोदी ने थिरु एथिराज के निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि ऐतिहासिक सेंगोल के निर्माण में उनके योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा जिसे पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को भेंट किया गया था।

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