लखनऊ , मई 30 -- संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई) ने मृत अंगदान के क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए एक कैडेवरिक डोनर से प्राप्त अंगों का सफल प्रत्यारोपण कर पांच मरीजों को नया जीवन प्रदान किया है।
संस्थान के सेवानिवृत्त सहायक नर्सिंग अधीक्षक फनीश मणि त्रिपाठी को सड़क दुर्घटना के बाद ब्रेन डेड घोषित किया गया था। कठिन परिस्थितियों के बावजूद उनके परिजनों ने अंगदान के लिए सहमति प्रदान की, जिसके फलस्वरूप दो किडनी, एक लिवर और दो कॉर्निया प्राप्त किए गए।
संस्थान प्रशासन के अनुसार 29 मई को ही अंगों की प्राप्ति और प्रत्यारोपण की पूरी प्रक्रिया सफलतापूर्वक संपन्न कर ली गई। दोनों किडनी और लिवर का प्रत्यारोपण एसजीपीजीआई में किया गया, जबकि कॉर्निया को राज्य अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (सोट्टो) और किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) के समन्वय से उसी दिन केजीएमयू में प्रत्यारोपित किया गया।
एसजीपीजीआई में पहली बार मृत दाता से कॉर्निया प्राप्त करने और उसके सफल प्रत्यारोपण की प्रक्रिया पूरी की गई। इसके लिए सोट्टो के संयुक्त निदेशक प्रो. आर. हर्षवर्धन एवं उनकी टीम ने पूरी रात कार्य किया।
किडनी रिट्रीवल एवं प्रत्यारोपण का नेतृत्व यूरोलॉजी एवं गुर्दा प्रत्यारोपण विभाग के अध्यक्ष प्रो. एम.एस. अंसारी ने किया, जबकि लिवर रिट्रीवल एवं प्रत्यारोपण की जिम्मेदारी लिवर प्रत्यारोपण इकाई के विशेषज्ञों ने संभाली। कॉर्निया रिट्रीवल केजीएमयू की विशेषज्ञ टीम द्वारा किया गया।
एसजीपीजीआई के निदेशक प्रो. राधा कृष्ण धीमन ने इस उपलब्धि को संस्थान के लिए ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि भविष्य में संस्थान के भीतर ही अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण की सभी सुविधाओं को और सशक्त बनाया जाएगा, ताकि प्रदेश के मरीजों को उपचार के लिए राज्य से बाहर न जाना पड़े।
यूरोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो. एम.एस. अंसारी ने बताया कि प्राप्त दोनों किडनी का प्रत्यारोपण दो ऐसे युवा मरीजों में किया गया जो कई वर्षों से डायलिसिस पर निर्भर थे। इनमें बहराइच के 32 वर्षीय पुरुष और अमेठी की 31 वर्षीय महिला शामिल हैं।
सर्जिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग की प्रो. सुप्रिया शर्मा ने कहा कि यह अंगदान मानवता, विश्वास और सामाजिक संवेदनशीलता का उत्कृष्ट उदाहरण है। दाता परिवार के इस निर्णय ने कई मरीजों के जीवन में नई उम्मीद जगाई है।
नेत्र विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. विकास कनौजिया ने बताया कि एसजीपीजीआई सितंबर 2026 तक अस्पताल आधारित कॉर्नियल रिट्रीवल एवं कॉर्नियल ट्रांसप्लांट सेवाएं शुरू करने की योजना पर कार्य कर रहा है। साथ ही भविष्य में आई बैंक एसोसिएशन ऑफ इंडिया के मानकों के अनुरूप एक समर्पित आई बैंक की स्थापना भी प्रस्तावित है।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित