लखनऊ , अगस्त 12 -- संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई), लखनऊ ने शोध के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए अगस्त तक भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) से करीब 20 करोड़ रुपये की फंडिंग प्राप्त की है।

संस्थान के पांच शोध प्रस्तावों को करीब 11.2 करोड़ रुपये की फंडिंग के लिए चुना गया है, जबकि इंटरमीडिएट श्रेणी में तीन परियोजनाओं को 8.46 करोड़ रुपये की अतिरिक्त फंडिंग मिली है।

संस्थान के निदेशक प्रो. राधा कृष्ण धीमन ने कहा कि यह उपलब्धि एसजीपीजीआई के मजबूत शोध तंत्र, विभिन्न चिकित्सा क्षेत्रों में विशेषज्ञता और नवाचार एवं ट्रांसलेशनल रिसर्च के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि संस्थान का प्रयास वैज्ञानिक खोजों को मरीजों की देखभाल में उपयोगी बदलाव में बदलना है।

संस्थान के डीन प्रो. शालीन कुमार ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया में आठ शोध प्रस्तावों का चयन संस्थान के शिक्षकों की वैज्ञानिक क्षमता और यहां विकसित अनुकूल शोध वातावरण की बड़ी उपलब्धि है। रिसर्च की फैकल्टी इंचार्ज प्रो. विनीता अग्रवाल के अनुसार संस्थान को आईसीएमआर की कॉल के लिए फैकल्टी से 81 प्रस्ताव मिले थे, जिनमें से 22 प्रस्तावों को आईसीएमआर भेजने के लिए चुना गया और अंततः पांच प्रस्तावों को फंडिंग मिली।

चयनित परियोजनाओं में मॉलिक्यूलर मेडिसिन, ऑर्गेनॉइड टेक्नोलॉजी, नेक्स्ट-जेनरेशन सीक्वेंसिंग, कैंसर बायोलॉजी और उपचार संबंधी नवाचार जैसे क्षेत्र शामिल हैं। शोध में एमएएसएलडी, ग्लियोब्लास्टोमा, गर्भावस्था संबंधी एनीमिया, किडनी ट्रांसप्लांटेशन, कैंसर इम्यूनोथेरेपी, नवजात शिशुओं की बीमारियां, वायरल हेपेटाइटिस और किडनी रोग जैसे विषयों को शामिल किया गया है।

असिस्टेंट फैकल्टी इंचार्ज (रिसर्च) डॉ. अतुल गर्ग ने कहा कि परियोजनाओं का दायरा एसजीपीजीआई में हो रहे शोध की वैज्ञानिक विविधता और क्लिनिकल महत्व को दर्शाता है। संस्थान ने इस उपलब्धि के लिए संबंधित शोधकर्ताओं और उनकी टीमों को बधाई देते हुए परियोजनाओं के सफल क्रियान्वयन की कामना की है।

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