लखनऊ , जुलाई 30 -- संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआईएमएस) के चिकित्सकों ने 35 वर्षीय अविवाहित युवती की जटिल सर्जरी कर उसके बाएं अंडाशय से 28.7x20.4x15.8 सेंटीमीटर आकार का विशाल ट्यूमर सफलतापूर्वक निकाल दिया। ट्यूमर से लगभग 7.5 लीटर तरल पदार्थ निकाला गया। चिकित्सकों ने सर्जरी के दौरान मरीज की भविष्य की प्रजनन क्षमता को ध्यान में रखते हुए दाहिना अंडाशय और गर्भाशय सुरक्षित रखा। संस्थान की ओर से गुरुवार को जारी जानकारी के अनुसार मरीज कई महीनों से पेट फूलने, भारीपन और सांस लेने में कठिनाई की समस्या से जूझ रही थी। जांच में उसके बाएं अंडाशय में लगभग नौ माह की गर्भावस्था के बराबर आकार का ट्यूमर पाया गया, जो मूत्राशय और आंतों पर दबाव डाल रहा था। इसके कारण मरीज को चलने-फिरने और सांस लेने में भी परेशानी हो रही थी।
सर्जरी के दौरान दाहिने अंडाशय में भी 6.5x3.8x6.5 सेंटीमीटर आकार की एक सिस्ट मिली। ऑपरेशन के समय उपलब्ध फ्रोजन सेक्शन जांच में ट्यूमर सौम्य (बेनाइन) पाया गया। इसके बाद चिकित्सकों ने केवल आवश्यक सर्जरी करते हुए दाहिने अंडाशय और गर्भाशय को सुरक्षित रखा, जिससे भविष्य में प्रजनन क्षमता बनाए रखने की संभावना बनी रही।
इस जटिल सर्जरी को स्त्री रोग विशेषज्ञों की टीम ने सफलतापूर्वक अंजाम दिया। टीम में डॉ. निधि सिंह, डॉ. अंजू रानी, डॉ. मोनिका और डॉ. शिखा शामिल रहीं। एनेस्थीसिया की जिम्मेदारी डॉ. निधि ने संभाली, जबकि पैथोलॉजी जांच में डॉ. ऋतु वर्मा और डॉ. राम नवल राव का महत्वपूर्ण योगदान रहा। नर्सिंग टीम में दिव्या, सोनाली, वंदना और बीरभान वर्मा शामिल रहे।
डॉ. निधि सिंह ने बताया कि अंडाशय के ट्यूमर प्रारंभिक अवस्था में अक्सर स्पष्ट लक्षण नहीं देते और धीरे-धीरे काफी बड़े हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि लगातार पेट फूलना, पेट में असामान्य भारीपन, जल्दी पेट भरना, पेशाब या मल त्याग में परेशानी तथा सांस लेने में कठिनाई जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे लक्षण लंबे समय तक बने रहने पर विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लेकर आवश्यक जांच करानी चाहिए।
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