नैनीताल , अक्टूबर 28 -- उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) में उप कमांडेंट (संचार) के पद पर तैनात हरीश चंद्र सिंह बिष्ट के मामले में विभागीय जांच तीन सप्ताह के भीतर पूरी कर अंतिम आदेश पारित करने के निर्देश दिए हैं।

न्यायालय ने यह भी कहा कि पदोन्नति के लिए चल रही प्रक्रिया में याचिकाकर्ता के दावे पर विचार किया जाए, लेकिन उसका परिणाम सीलबंद लिफाफे में रखा जाए। इसे विभागीय कार्यवाही से आरोपमुक्त होने की स्थिति में ही खोला जाएगा।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार तिवारी और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने 26 अक्टूबर को यह आदेश पारित किया। याचिकाकर्ता वर्तमान में रानीखेत में कार्यरत हैं।

याचिका में 30 जून 2025 को जारी आरोपपत्र और इसके आधार पर 11 जुलाई 2025 को रिकॉर्ड ऑफ एविडेंस तैयार करने के आदेश को चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ता का आरोप था कि पदोन्नति की प्रक्रिया के दौरान उनके खिलाफ आरोपपत्र जारी किया गया, जिससे कमांडेंट (संचार) के पद पर पदोन्नति के लिए विचार किए जाने के अवसर पर असर पड़ा।

न्यायालय ने कहा कि सामान्यतः आरोपपत्र को अदालत में चुनौती नहीं दी जा सकती, जब तक उसे जारी करने वाला प्राधिकारी सक्षम न हो। इस मामले में याचिकाकर्ता ने आरोपपत्र जारी करने वाले अधिकारी की अधिकारिता पर सवाल नहीं उठाया, इसलिए न्यायालय ने आरोपों के पीछे की मंशा पर निर्णय देने के बजाय विभागीय कार्यवाही समयबद्ध तरीके से पूरी करने का निर्देश दिया।

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