नयी दिल्ली , सितंबर 02 -- केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान गुरुवार को मुंबई में एसएचजी-बैंक लिंकेज और व्यक्तिगत उद्यम फाइनेंसिंग पर बैंकों और राज्य ग्रामीण आजीविका मिशनों (एसआरएलएमएस) के साथ होने वाली उच्च-स्तरीय बैठक की अध्यक्षता करेंगे।

आधिकारिक जानकारी के अनुसार बैठक में ग्रामीण विकास एवं संचार राज्य मंत्री डॉ चंद्रशेखर पेम्मासानी, ग्रामीण विकास राज्य मंत्री कमलेश पासवान और महाराष्ट्र सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री भी मौजूद रहेंगे।

केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय के प्रमुख कार्यक्रमों में से एक 'दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन' लागू कर रहा है। इसका मकसद ग्रामीण इलाकों में समुदाय-आधारित संस्थाएं बनाना और उन्हें टिकाऊ आजीविका के साधनों से जोड़ना है। पिछले डेढ़ दशक में, इस मिशन ने 10 करोड़ से ज़्यादा ग्रामीण महिलाओं को 93 लाख से ज़्यादा स्वयं सहायता समूहों और उनके संघों से जोड़ा है। इस सफर में बैंकिंग सेक्टर एक अहम साझेदार रहा है, जिसने एसएचजीएस को कुल मिलाकर 13.67 लाख करोड़ रुपये से ज़्यादा का कर्ज दिया है, और कर्ज चुकाने का रिकॉर्ड भी लगातार बहुत अच्छा रहा है।संस्थागत कर्ज की अच्छी उपलब्धता की वजह से बड़ी संख्या में एवएचजी सदस्यों ने आजीविका से जुड़े कारोबार शुरू किये और उन्हें बढ़ाया है, इनमें से 3.46 करोड़ महिलाएं 'लखपति दीदी' बनी हैं। जैसे-जैसे इनमें से कई कारोबार विकास के चरण में पहुंच रहे हैं और नये उद्यम सामने आ रहे हैं, मिशन की अगली रणनीतिक प्राथमिकता महिलाओं के नेतृत्व वाले उद्यमों को बढ़ावा देना, उन्हें आसानी से कर्ज दिलाना और उन्हें टिकाऊ ग्रामीण व्यवसायों में बदलने में मदद करना है।

बैठक में भारतीय रिजर्व बैंक, वित्तीय सेवा विभाग, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों, निजी क्षेत्र के बैंकों, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों, सहकारी बैंकों, नाबार्ड, पीएफआरडीए, केंद्रीय मंत्रालयों, राज्य ग्रामीण आजीविका मिशनों और अन्य प्रमुख हितधारक संस्थाओं के वरिष्ठ प्रतिनिधि शामिल होंगे।

समीक्षा बैठक से पहले, केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री स्वयं सहायता समूहों की 'दीदियों' के साथ विस्तार से बातचीत करेंगे, इनमें से कई 'लखपति दीदी' हैं, जो ग्रामीण इलाकों में स्थापित कारोबार चला रही हैं। सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बैंकों के प्रबंध निदेशक और कार्यकारी निदेशक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों और एपेक्स कोऑपरेटिव बैंकों के अध्यक्ष, और राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अब तक हुई प्रगति और आगे की राह पर अपने विचार साझा करेंगे। चर्चाओं में मुख्य रूप से इन बातों पर ध्यान दिया जायेगा: व्यक्तिगत उद्यम क्रेडिट पोर्टफोलियो को दोगुना करना, एसएचजी को दिये जाने वाले लोन की औसत राशि बढ़ाना, लोन मंज़ूरी और वितरण में लगने वाले समय को कम करना, मुश्किल इलाकों सहित बाकी एसएचजी के लिए क्रेडिट लिंकेज सुनिश्चित करने की रणनीतियां बनाना, और डिस्ट्रिक्ट सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक ( डीसीसीबी) और प्राइमरी एग्रीकल्चरल क्रेडिट सोसाइटी (पैक्स) के स्तर पर कोऑपरेटिव क्रेडिट ढांचे की भूमिका को मजबूत करना।

इन चर्चाओं से 'वित्तीय समावेशन 2.0' विज़न को लागू करने की भविष्य की कार्ययोजना तैयार करने में मदद मिलेगी। इस विजन का मकसद एसएचजी के लिए समय पर और पर्याप्त क्रेडिट सुनिश्चित करना, महिलाओं के नेतृत्व वाले उद्यमों के लिए खास फाइनेंसिंग की व्यवस्था करना और ग्रामीण भारत में बेहतर फाइनेंशियल सेवाओं तक पहुंच बढ़ाना है।

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