प्रयागराज , फरवरी 02 -- उत्तर प्रदेश के प्रयागराज स्थित एसआरएन हॉस्पिटल के युवा कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. विमल निषाद, डॉ. वैभव श्रीवास्तव और उनकी सहयोगी डॉ. ऋषिका पटेल की टीम ने जटिल हृदय रोगों से पीड़ित तीन मरीजों का सफल उपचार कर उन्हें नया जीवन प्रदान किया। खास बात यह रही कि तीनों मरीजों का इलाज बिना ओपन सर्जरी के किया गया।

कोरांव निवासी 58 वर्षीय पुरुष लंबे समय से ब्लैडर आउटलेट ऑब्स्ट्रक्शन से पीड़ित थे। उनके हृदय में 32 मिमी का एट्रियल सेप्टल डिफेक्ट (एएसडी) था, जिसके कारण कोई सर्जन उनका ऑपरेशन करने को तैयार नहीं था। पिछले एक वर्ष से परेशान इस मरीज का डॉक्टरों की टीम ने 40 मिमी डिवाइस के माध्यम से बिना चीरा लगाए हृदय का छेद सफलतापूर्वक बंद कर दिया। चिकित्सकों के अनुसार अब तीन माह बाद उनकी ब्लैडर सर्जरी सुरक्षित रूप से की जा सकेगी।

इसी प्रकार फूलपुर निवासी 52 वर्षीय महिला के हृदय में 31 मिमी का छेद था, जिससे उनका दाहिना हृदय फेल हो चुका था और लीवर में गंभीर कंजेशन की समस्या उत्पन्न हो गई थी। चिकित्सक दल ने दाहिनी जांघ की नस के माध्यम से 38 मिमी डिवाइस डालकर छेद को बंद किया। डॉक्टरों का कहना है कि आगामी 3 से 6 महीनों में हार्ट फेल्योर और लीवर की स्थिति में स्पष्ट सुधार होगा। वर्तमान में दोनों मरीज स्वस्थ हैं।

तीसरे मामले में जारी बाजार निवासी 25 वर्षीय युवक पिछले तीन वर्षों से सांस फूलने और धड़कन की समस्या से जूझ रहा था। पिछले तीन माह से वह टीबी की दवा ले रहा था, लेकिन कुंभ मेले में कल्पवास के दौरान उसकी हालत बिगड़ गई और हार्ट फेल्योर हो गया। जांच में टीबी नहीं पाई गई, बल्कि गंभीर माइट्रल स्टेनोसिस (बाएं हृदय वाल्व का संकुचन) की पुष्टि हुई।

मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. वी.के. पांडेय ने आर्थिक सहायता प्रदान कर निःशुल्क बैलून माइट्रल वॉल्वोटॉमी कराई। उपचार के बाद युवक की हालत में तेजी से सुधार हो रहा है।

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