बेंगलुरु , मई 22 -- कर्नाटक सरकार मतदाता सूचियों के प्रस्तावित विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर उच्चतम न्यायालय जाने पर विचार कर रही है। सरकार को डर है कि इस प्रक्रिया से असली मतदाताओं के नाम बड़े पैमाने पर हटाये जा सकते हैं, जिससे चुनावी पारदर्शिता प्रभावित होगी।

मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की अध्यक्षता में गुरुवार को हुई कैबिनेट बैठक में यह मुद्दा प्रमुखता से उठा। मंत्रियों ने राज्य में अगले महीने शुरू होने वाली एसआईआर प्रक्रिया से पहले मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए कानूनी और प्रशासनिक विकल्पों पर चर्चा की है। कर्नाटक के कानून और संसदीय कार्य मंत्री एचके पाटिल ने कहा कि सरकार उच्चतम न्यायालय का रुख करने के बारे में अगले तीन से चार दिनों के भीतर अंतिम फैसला लेगी।

श्री पाटिल ने पत्रकारों को बताया, "हमने सभी संभावनाओं पर चर्चा की है, जिसमें प्रक्रिया के चलते रहने के दौरान या फिर अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होने के बाद उच्चतम न्यायालय जाना शामिल है। अगले तीन से चार दिनों में इस पर अंतिम फैसला हो जायेगा।" श्री पाटिल के मुताबिक, सरकार ने एसआईआर प्रक्रिया को लेकर '10 से 12 चिंताओं' की पहचान की है, हालांकि उन्होंने इन पर विस्तार से बताने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री और वरिष्ठ नेताओं के साथ बातचीत जारी रहेगी और 24 या 25 मई तक अंतिम फैसला होने की संभावना है।

श्री पाटिल ने आरोप लगाया कि दूसरे राज्यों में इसी तरह के संशोधन अभियानों के कारण बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम कट गये थे। इससे चुनावी व्यवस्था में पारदर्शिता और जनता के भरोसे पर सवाल खड़े हुए हैं। उन्होंने कहा, "पश्चिम बंगाल में 27 लाख मतदाताओं ने अपना वोट देने का अधिकार खो दिया और तमिलनाडु में भी इससे कहीं ज़्यादा लोग प्रभावित हुए। यह लोकतंत्र को कमजोर करता है। हम यह सुनिश्चित करने की हर मुमकिन कोशिश कर रहे हैं कि नागरिकों को उनके मताधिकार से महरूम न किया जाये और वे सुरक्षित महसूस करें। चुनाव आयोग को पारदर्शी और जवाबदेह होना चाहिए।"उन्होंने जोर देकर कहा कि कैबिनेट ने 'किसी भी क़ीमत पर' मतदान के अधिकारों की रक्षा करने का संकल्प लिया है। उन्होंने कहा, "अगर कोई भी मतदाता अपना वोट देने का अधिकार खोता है तो कैबिनेट ने हर हाल में उनके अधिकारों को बहाल करने का फैसला किया है।" श्री पाटिल ने यह संकेत भी दिया कि विचाराधीन कानूनी मुद्दों में से एक यह भी था कि क्या अंतिम मतदाता सूची को उसके औपचारिक प्रकाशन से पहले उच्चतम न्यायालय के सामने रखा जाना चाहिए।

चुनाव आयोग ने घोषणा की है कि कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को कवर करने वाले देशव्यापी संशोधन कार्यक्रम के हिस्से के रूप में कर्नाटक में एसआईआर अभियान 20 जून से शुरू होगा। इसके तहत ड्राफ्ट वोटर लिस्ट पांच अगस्त को प्रकाशित की जानी है, जबकि अंतिम सूची सात अक्टूबर को आने की उम्मीद है। इस अभियान में लगभग 59,000 बूथ-लेवल अधिकारी पूरे कर्नाटक में 5.5 करोड़ से ज़्यादा मतदाताओं का घर-घर जाकर सत्यापन करेंगे। कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने एसआईआर प्रक्रिया पर बार-बार आशंकाएं जतायी हैं और आरोप लगाया है कि इससे मतदाता सूची से असली मतदाताओं के नाम ग़लत तरीके से हटाये जा सकते हैं।

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