चंडीगढ़ , सितंबर 23 -- पूर्व जिला चुनाव अधिकारी और चुनाव आयोग के पूर्व पर्यवेक्षक के.बी.एस. सिद्धू ने बुधवार को चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी से विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर उनके द्वारा दर्ज आपत्तियों पर पूर्ण निर्वाचन आयोग की बैठक बुलाने और बहुमत के आधार पर निर्णय लेने का आग्रह किया है।

श्री संधू और श्री जोशी को लिखे पत्र में श्री सिद्धू ने कहा कि मीडिया रिपोर्टों के अनुसार दोनों चुनाव आयुक्तों ने पिछले दस महीनों में कम से कम 14 बार आयोग के कुछ निर्णयों पर लिखित आपत्ति दर्ज की है। इन आपत्तियों में नए मतदाताओं के लिए फॉर्म-6 में बदलाव, मतदाता सूची के डेटाबेस तक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों की पहुंच, पश्चिम बंगाल में मतदाताओं से संबंधित अपील और गोवा में पात्र मतदाताओं के नाम बहाल करने से जुड़े तकनीकी मुद्दे शामिल हैं।

श्री सिद्धू ने कहा कि 2023 के कानून के तहत आयोग का काम यथासंभव सर्वसम्मति से और मतभेद की स्थिति में बहुमत से तय किया जाता है। उन्होंने दोनों चुनाव आयुक्तों से अनुरोध किया कि वे पूर्ण आयोग की बैठक बुलाकर इन मुद्दों पर प्रस्ताव रखें और लिए गए निर्णयों तथा असहमति को सार्वजनिक रिकॉर्ड का हिस्सा बनाएं। उन्होंने विशेष रूप से फॉर्म-6 में एसआईआर से संबंधित सवाल को हटाने, निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों को मतदाता सूची के डिजिटल डेटाबेस तक पूर्ण पहुंच देने, पश्चिम बंगाल में दायर अपीलों के प्राधिकरण का खुलासा करने तथा गोवा सहित अन्य राज्यों में पात्र मतदाताओं को बहाल करने के लिए सॉफ्टवेयर में आवश्यक व्यवस्था करने का आग्रह किया।

पत्र में सिद्धू ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 326 के तहत पात्र नागरिकों के मतदाता के रूप में पंजीकरण के अधिकार को किसी अतिरिक्त प्रक्रिया या पुराने मतदाता रिकॉर्ड से जुड़ाव की शर्त से बाधित नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पंजाब की अंतिम मतदाता सूची 12 अक्टूबर और दिल्ली की चार नवंबर को निर्धारित है, इसलिए संबंधित मुद्दों पर जल्द निर्णय लिया जाना चाहिए।

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