पुड्डुचेरी , अप्रैल 10 -- पुड्डुचेरी में देश की आज़ादी के बाद से अब तक का सबसे ज़्यादा, 91.23 प्रतिशत मतदान दर्ज होने का मुख्य कारण मतदाता सूची के 'विशेष गहन संशोधन' (एसआईआर) बताया जा रहा है।

सूत्रों ने शुक्रवार को बताया कि अंतिम मतदाता सूची तैयार करने के लिए मृत मतदाताओं और एक से ज़्यादा निर्वाचन क्षेत्रों में पंजीकृत मतदाताओं के नाम हटा दिए गए। एसआईआर प्रक्रिया के बाद अंतिम मतदाता सूची से कुल 1,03,467 मतदाताओं के नाम हटा दिए गए। इनमें 20,798 मृत मतदाता, 80,645 ऐसे मतदाता जो दूसरी जगहों पर चले गए है, और 2,024 ऐसे लोग शामिल थे जिनके नाम एक से ज़्यादा निर्वाचन क्षेत्रों में दर्ज थे। पुरानी सूची में मतदाताओं की कुल संख्या 10,21,578 थी, जो घटकर 9,18,111 रह गई।

दूसरा कारण यह है कि युवा पीढ़ी, जो आमतौर पर चुनावों में कोई दिलचस्पी नहीं लेती और अपना समय सिनेमा, क्रिकेट आदि में बिताती है, उसने भी इस चुनाव में सक्रिय रूप से भाग लिया और अपने मताधिकार का प्रयोग किया।

बताया जा रहा है कि तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) के संस्थापक अध्यक्ष और अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी के चुनावी मैदान में उतरने से युवाओं को वोट डालने का प्रोत्साहन मिला। इसके अलावा, भारी मात्रा में कैश और तोहफ़ों का बँटना भी इस भारी मतदान का एक कारण माना जा रहा है।

उल्लेखनीय है कि आज़ादी के बाद से पुड्डुचेरी की चुनावी राजनीति के इतिहास में 1964 में हुए पहले चुनावों के बाद से कल हुए एक ही चरण के मतदान में एक नया रिकॉर्ड बना। तीस सदस्यों वाली पुड्डुचेरी विधानसभा के चुनाव में 91.23 प्रतिशत का अब तक का सबसे ज़्यादा मतदान दर्ज किया गया।

पुड्डुचेरी के मुख्य चुनाव अधिकारी पी. जवाहर ने अंतिम मतदान प्रतिशत जारी करते हुए बताया कि 1,099 मतदान केंद्रों पर 89.87 प्रतिशत मतदाताओं ने ईवीएम के ज़रिए वोट डाले। वहीं पोस्टल बैलेट से डाले गए 1.36 प्रतिशत वोटों को जोड़ने के बाद यह आँकड़ा बढ़कर 91.32 प्रतिशत के ऐतिहासिक स्तर पर पहुँच गया। उन्होंने कहा कि 1964 में हुए पहले विधानसभा चुनावों से लेकर अब तक विधानसभा और लोकसभा के चुनावों में यह अब तक का सबसे ज़्यादा मतदान है। उन्होंने इसे एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताया, जिसने 2011 में बने 85.57 प्रतिशत के पिछले रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया। इससे पहले, 1974 में 85.33 प्रतिशत, 2006 में 85.29 प्रतिशत मतदान हुआ था।

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