बेंगलुरु , अक्टूबर 27 -- कर्नाटक में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद जारी अंतिम मतदाता सूची में कुल मतदाताओं की संख्या 4.55 करोड़ दर्ज की गई है, जो संशोधन से पहले के 5.54 करोड़ के आंकड़े से लगभग 99.32 लाख कम है। वहीं, चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि पात्र नहीं पाए गए मतदाताओं के मामलों में सुनवाई के बाद अधिकृत अधिकारियों द्वारा 61,960 फॉर्म 7 जनरेट किए गए थे।

राज्य चुनाव अधिकारियों के जारी आंकड़ों के अनुसार, मंगलवार को प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची में 4,54,55,689 सामान्य मतदाता और 44,322 सेवा (सर्विस) मतदाता शामिल हैं, जिससे कुल मतदाताओं की संख्या 4,55,00,011 हो गई है।

मुख्य चुनाव अधिकारी वी. अनबुकुमार ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में स्पष्ट किया कि 61,960 फॉर्म 7 चुनाव पंजीकरण अधिकारियों और अन्य अधिकृत अधिकारियों द्वारा सुनवाई और कारण सहित आदेश जारी करने के बाद तैयार किए गए थे। उन्होंने इस बात से इनकार किया कि ये फॉर्म थोक के हिसाब से जेनरेट हुए थे। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया व्यक्तिगत मामलों की गहन जांच के बाद ही अपनाई गई है।

यह स्पष्टीकरण फॉर्म 7 आवेदनों के जनरेशन को लेकर उठ रहे सवालों के बीच काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस फॉर्म का उपयोग मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए किया जाता है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि ऐसे फॉर्मों के थोक में जेनरेशन का कोई प्रावधान नहीं है और संबंधित अधिकारियों ने केवल उन्हीं मामलों में इन्हें जारी किया है जहां निर्धारित प्रक्रिया के बाद मतदाता अयोग्य पाए गए।

चुनाव आयोग ने बताया कि संशोधन प्रक्रिया के दौरान लगभग 43.82 लाख मतदाताओं को नोटिस जारी किए गए थे। इन सुनवाइयों का उद्देश्य अंतिम सूची प्रकाशित होने से पहले विसंगतियों की जांच करना और मतदाताओं की पात्रता स्थापित करना था।

इससे पहले 24 अगस्त को प्रारूप मतदाता सूची प्रकाशित की गई थी। उस समय कर्नाटक में 4,46,80,150 मतदाता थे, जबकि संशोधन से पहले यह संख्या 5,54,32,314 दर्ज की गई थी। अब अंतिम मतदाता संख्या 4,55,00,011 पर स्थिर हुई है।

आंकड़ों से संकेत मिलता है कि शुरुआती संशोधन अभ्यास के दौरान मतदाताओं की संख्या में भारी गिरावट आई थी, जिसके बाद नए नाम जुड़ने से इसमें कुछ सुधार हुआ। हालांकि, अधिकारियों ने 99.32 लाख मतदाताओं की कुल कमी की श्रेणीवार विस्तृत व्याख्या संवाददाता सम्मेलन के दौरान साझा नहीं की।

आयोग के अनुसार 16 जून से 26 अक्टूबर के बीच, फॉर्म 6, 6ए, 7 और 8 के तहत कुल 26,23,875 आवेदन प्राप्त हुए। इनमें नाम जोड़ने के लिए फॉर्म 6 के 10,62,336 आवेदन, 4,872 फॉर्म 6ए आवेदन, नाम हटाने के लिए फॉर्म 7 के 2,29,235 आवेदन और सुधार व अन्य बदलावों के लिए फॉर्म 8 के 13,27,432 आवेदन शामिल थे।

आयोग में घोषित आंकड़ों के अनुसार, प्राप्त कुल आवेदनों में से 20.64 लाख स्वीकार किए गए, 3.03 लाख खारिज किए गए और 2.55 लाख आवेदन लंबित रहे।सीईओ ने बताया कि 99 प्रतिशत से अधिक आवेदन ऑनलाइन जमा हुए थे, जिसका श्रेय मतदाता जागरूकता प्रयासों और संशोधन अवधि के दौरान चलाए गए विशेष अभियान को जाता है।

अधिकारियों ने प्रारूप सूची से अंतिम प्रक्रिया के दौरान कुल 1,88,324 नाम हटाए जाने की रिपोर्ट दी। इनमें निवास स्थान बदलने के 1,24,327 मामले, सुनवाई के बाद अयोग्य पाए गए 61,960 मामले और मौतों, अनुपस्थिति तथा दोहरे नामांकन से जुड़े छोटे आंकड़े शामिल हैं।

विस्तृत ब्योरे के अनुसार, मौतों के कारण 1,091 नाम हटाए गए, 184 मामले अनुपस्थित श्रेणी में थे और 762 दोहरे नामांकन पाए गए। बाकी प्रमुख श्रेणियां निवास परिवर्तन और सुनवाई के दौरान अयोग्य पाए गए मामलों की थीं।

श्री अनबुकुमार ने बताया कि जब कोई मतदाता अपना निवास बदलता है और फॉर्म 8 के माध्यम से आवेदन करता है, तो उसका नाम नए निर्वाचन क्षेत्र में स्थानांतरित कर दिया जाता है और पुराने क्षेत्र से हटा दिया जाता है। ऐसे मामलों को पात्रता सुनवाई के बाद हटाए गए नामों से अलग देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि 61,960 मामलों पर सक्षम अधिकारियों ने नोटिस और सुनवाई के बाद उचित आदेश जारी करके ही नाम सूची से हटाए हैं।

अंतिम मतदाता सूची में 2,25,83,107 पुरुष मतदाता, 2,29,14,063 महिला मतदाता और 2,741 थर्ड-जेंडर के मतदाता शामिल हैं।प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, 18-19 आयु वर्ग में 6,83,364 युवा मतदाता और 20-29 आयु वर्ग में 86,56,838 मतदाता हैं। सूची में 5,65,340 दिव्यांग मतदाता, 85 वर्ष से अधिक आयु के 3,92,134 मतदाता और 3,252 विदेशी मतदाता भी शामिल हैं।

सीईओ ने इस पुनरीक्षण में भागीदारी के लिए पंजीकृत राजनीतिक दलों, उनके बूथ-स्तरीय एजेंटों, नागरिक समाज संगठनों, चुनाव अधिकारियों और मीडिया का धन्यवाद व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि इस मैदानी कार्य में लगभग 1.35 लाख बूथ स्तरीय एजेंट शामिल थे।

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