चेन्नई , मार्च 24 -- पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के चलते एलपीजी की बढ़ती कमी के बीच तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के उस बयान पर निशाना साधा है जिसमें लोगों से युद्ध के प्रभावों के लिए तैयार रहने को कहा गया था।
श्री स्टालिन ने मंगलवार को एक विस्तृत पोस्ट में सवाल उठाया कि आखिर तैयार किसे होना चाहिए, केंद्र सरकार को या देश की जनता को। उन्होंने पूछा कि क्या प्रधानमंत्री खुद लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तैयार हैं। श्री स्टालिन ने प्रधानमंत्री के उस बयान का हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि जैसे लोग कोविड-19 के दौरान तैयार थे, वैसे ही उन्हें पश्चिम एशिया युद्ध के प्रभावों के लिए भी तैयार रहना चाहिए। उन्होंने केंद्र सरकार पर दूरदर्शिता और तैयारी के अभाव में काम करने का आरोप लगाया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि युद्ध की स्थिति गंभीर होने के तुरंत बाद उन्होंने 11 मार्च को प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर एलपीजी की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने, खाड़ी देशों में फंसे तमिलों की वापसी और बिजलीघरों के लिए गैस आपूर्ति पुनर्गठित करने की मांग की थी।
उन्होंने बताया कि 12 मार्च को विपक्षी दलों ने संसद में विरोध प्रदर्शन किया और 15 मार्च को तमिलनाडु में सेक्युलर प्रोग्रेसिव एलायंस दलों ने भी केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया।
श्री स्टालिन ने कहा कि राज्य सरकार ने खुद पहल करते हुए वैकल्पिक उपाय लागू किए, जिनमें एलपीजी के बजाय इलेक्ट्रिक स्टोव के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए अतिरिक्त बिजली खपत पर प्रति यूनिट दो रुपये की सब्सिडी, एमएसएमई इकाइयों को रियायती ऋण और वैकल्पिक ईंधन उपयोग के लिए औद्योगिक प्रक्रियाओं में छूट शामिल हैं।
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