रायपुर , जुलाई 21 -- छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ने मरीजों की सुविधा के लिए लैब जांच प्रक्रिया को पूरी तरह पेपरलेस बना दिया है।

नई व्यवस्था लागू होने के बाद अब ओपीडी मरीजों को लैब जांच के लिए डॉक्टर की लिखी हुई पर्ची लेकर जाने की आवश्यकता नहीं होगी। चिकित्सक द्वारा सिस्टम में दर्ज की गई जांच संबंधी रिक्वेस्ट सीधे लैब तक पहुंच जाएगी।

नई व्यवस्था के तहत चिकित्सक जैसे ही किसी मरीज के लिए जांच लिखेंगे, उसकी जानकारी ऑनलाइन लैब सिस्टम में उपलब्ध हो जाएगी। इसके बाद मरीज को सीधे डोम-1 फलेबोटोमी जोन पहुंचना होगा, जहां पंजीकरण के बाद बारकोड तैयार किया जाएगा। बारकोड बनने के बाद रक्त अथवा अन्य आवश्यक जांचों के लिए नमूना एकत्र किया जाएगा। इससे जांच प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक सरल और त्वरित हो जाएगी।

एम्स प्रशासन के अनुसार नई प्रणाली लागू होने से मरीजों को प्रिंटेड पर्ची साथ रखने की आवश्यकता समाप्त हो जाएगी। पर्ची खोने की समस्या भी नहीं रहेगी। सैंपल संग्रह की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित होगी, जांच में लगने वाला समय कम होगा तथा पूरी व्यवस्था पहले की अपेक्षा अधिक सुरक्षित बनेगी। इसके साथ ही कागज की खपत कम होने से पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलेगी।

मेडिकल सुपरिटेंडेंट प्रोफेसर डॉक्टर डीके त्रिपाठी ने कहा, "नई पेपरलेस व्यवस्था से प्रतिदिन एम्स पहुंचने वाले मरीजों को आराम मिलेगा. हॉस्पिटल का कार्य पहले आसान हो जाएगा. ओपीडी के जिन मरीजों को लैब में टेस्ट कराना है, वे सीधे जाकर सैंपल दे सकते हैं."एम्स का मानना है कि इस डिजिटल व्यवस्था से मरीजों को बेहतर और तेज स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के साथ अस्पताल की कार्यप्रणाली भी अधिक प्रभावी होगी।

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