पटना , मार्च 11 -- अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), पटना में "स्वास्थ्य सेवा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता : अनुसंधान से उपचार तक" विषय पर एक इंटरैक्टिव शैक्षणिक सत्र का आयोजन किया गया।
इस कार्यक्रम में आधुनिक चिकित्सा पद्धति में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (ए.आई.) की बढ़ती भूमिका और स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने में इसके योगदान पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम में चिकित्सकों, शोधकर्ताओं, प्रशासकों तथा तकनीकी विशेषज्ञों ने भाग लेते हुए स्वास्थ्य प्रणाली में ए.आई. के समावेशन और इसके माध्यम से रोगी देखभाल, नैदानिक निर्णय-निर्माण तथा चिकित्सा अनुसंधान को सुदृढ़ बनाने की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया।
कार्यक्रम की शुरुआत "स्वास्थ्य सेवा में ए.आई.: चिकित्सा, प्रौद्योगिकी और नेतृत्व के दृष्टिकोण" विषय पर आयोजित पैनल चर्चा से हुई।
इस सत्र की अध्यक्षता एम्स के कार्यकारी अध्यक्ष और मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रो. (ब्रिगेडियर) डॉ. राजू अग्रवाल ने की। उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने में ए.आई. की अपार संभावनाओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ए.आई. आधारित तकनीकें निदान की सटीकता बढ़ाने, अस्पताल की कार्यप्रणालियों को सुव्यवस्थित करने तथा साक्ष्य-आधारित निर्णय-निर्माण को सक्षम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं, जिससे रोगी-केंद्रित और अधिक प्रभावी स्वास्थ्य सेवाएँ सुनिश्चित की जा सकती हैं।
पैनल चर्चा में विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने स्वास्थ्य सेवाओं में ए.आई. के व्यावहारिक उपयोग पर अपने विचार साझा किए। डॉ. रितेश आर. धोटे, वैज्ञानिक-ई, सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग (सी-डैक), पटना, ने उभरती हुई ए.आई. तकनीकों तथा उनके स्वास्थ्य प्लेटफॉर्म में बढ़ते समावेशन पर चर्चा की। डॉ. अभ्युदय कुमार, फैकल्टी इंचार्ज (आई.टी. एवं एच.आई.एस.), एम्स पटना, ने ए.आई. आधारित क्लिनिकल निर्णय-समर्थन प्रणाली को सक्षम बनाने में डिजिटल स्वास्थ्य अवसंरचना और हॉस्पिटल इन्फॉर्मेशन सिस्टम की महत्वपूर्ण भूमिका पर बल दिया।
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