पटना , फरवरी 25 -- अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) पटना में बुधवार को कॉक्लियर इम्प्लांट दिवस मनाया गया।
कान-नाक-गला (ईएनटी) विभाग, एम्स पटना की ओर से आयोजित कार्यक्रम का उद्घाटन प्रो. (ब्रिग.) डॉ. राजू अग्रवाल, कार्यकारी निदेशक, एम्स पटना ने किया। उन्होंने कहा कि सुनने की क्षमता केवल ध्वनि सुनने का माध्यम नहीं बल्कि जीवन से जुड़ने का सेतु है। समय पर पहचान और उपचार बच्चों के भविष्य को नई दिशा दे सकता है।
विभागाध्यक्ष डॉ. क्रांति भावना, प्रोफेसर एवं प्रमुख, ईएनटी विभाग ने भावुक शब्दों में कहा कि कॉक्लियर इम्प्लांट एक तकनीक से बढ़कर उम्मीद की किरण है। उन्होंने बताया कि एम्स पटना में सर्जरी के साथ नियमित मैपिंग, स्पीच थेरेपी और दीर्घकालिक पुनर्वास की संपूर्ण व्यवस्था है जिससे बच्चों का आत्मविश्वास लौटता है और परिवारों में खुशियां वापस आती हैं।
कार्यक्रम में विशेषज्ञ व्याख्यान, लाभार्थियों की प्रेरक कहानियाँ और संवाद सत्र आयोजित किए गए। जिन बच्चों और वयस्कों की कॉक्लियर इम्प्लांट सर्जरी एम्स पटना में हुई है, उनमें से कुछ इस अवसर पर उपस्थित रहे। उनके अनुभवों ने यह साबित किया कि सही समय पर इलाज जीवन बदल सकता है।
इस अवसर पर गणमान्य अतिथियों ने बच्चों के साथ केक काटा, उन्हें केक खिलाया और उपहार देकर इस दिन को यादगार बना दिया।
वर्ष 2014 से अब तक एम्स पटना में लगभग 400 कॉक्लियर इम्प्लांट सर्जरी सफलतापूर्वक की जा चुकी हैं। आधुनिक ऑपरेशन थियेटर, उन्नत श्रवण जांच सुविधाएं और विशेषज्ञ डॉक्टरों, ऑडियोलॉजिस्ट व स्पीच थेरेपिस्ट की समर्पित टीम इस उपलब्धि की मजबूत नींव हैं।
कॉक्लियर इम्प्लांट सुविधा मेड-ईएलइंडिया प्राइवेट लिमिटेड के सहयोग से रियायती दरों पर उपलब्ध है। साथ ही मुख्यमंत्री राहत कोष (बिहार), राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम और एडीआईपी योजना के माध्यम से आर्थिक सहायता भी दी जाती है, जिससे कोई भी परिवार आर्थिक कारणों से इस उपचार से वंचित न रहे।
इस अवसर पर चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अनूप कुमार, प्रो. (डॉ.) संजय पांडेय, डीन (रिसर्च), प्रो. (डॉ.) रुचि सिन्हा, डीन (स्टूडेंट्स अफेयर्स) सहित विभाग के सभी वरिष्ठ सदस्य उपस्थित थे।यह आयोजन एक संदेश के साथ संपन्न हुआ कि खामोशी कोई सीमा नहीं है। सही उपचार, सही समय और सही सहयोग से हर आवाज़ को पहचान मिल सकती है। एम्स पटना इसी संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है, जिससे हर बच्चा अपनी दुनिया को सुन सके और अपनी आवाज़ से उसे सजा सके।
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