पटना, जुलाई 03 -- खिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), पटना, राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान परीक्षा बोर्ड (एनबीईएमएस) एवं सोसाइटी फॉर कम्युनिकेशन इन हेल्थकेयर (इंडिया) के सहयोग से पांच जुलाई 2026 (रविवार) को एम्स पटना के सभागार में "कम्युनिकेशन इन हेल्थकेयर" विषय पर एक राष्ट्रीय शैक्षणिक कार्यक्रम आयोजित करेगा। "सहानुभूति से रोगी सुरक्षा तक: क्लिनिकल प्रैक्टिस में प्रभावी व्यावसायिक संचार को सशक्त बनाना" विषय पर आधारित इस कार्यक्रम का उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं में प्रभावी संवाद के महत्व को रेखांकित करना है। यह कार्यक्रम रोगी सुरक्षा, आपसी विश्वास, बेहतर टीमवर्क, सूचित निर्णय तथा रोगी केंद्रित चिकित्सा सेवाओं को बढ़ावा देने पर केंद्रित होगा।
इस राष्ट्रीय शैक्षणिक कार्यक्रम में देशभर से लगभग 650 से 700 प्रतिभागियों के शामिल होने की उम्मीद है। इनमें वरिष्ठ चिकित्सक, चिकित्सा शिक्षक, विशेषज्ञ, स्नातकोत्तर विद्यार्थी, नर्सिंग अधिकारी, स्वास्थ्यकर्मी एवं चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े पेशेवर शामिल होंगे। विशेषज्ञ व्याख्यानों एवं अकादमिक चर्चाओं के माध्यम से प्रतिभागियों को प्रभावी चिकित्सकीय संवाद के विभिन्न पहलुओं से अवगत कराया जाएगा।
कार्यक्रम का उद्घाटन बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी मुख्य अतिथि के रूप में करेंगे। राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के अध्यक्ष एवं एनबीईएमएस के अध्यक्ष डॉ. अभिजात शेठ विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। एनबीईएमएस के कार्यकारी निदेशक एवं उपाध्यक्ष डॉ. मीनू बाजपेयी भी कार्यक्रम की शोभा बढ़ाएंगे।
यह कार्यक्रम एम्स पटना के कार्यकारी निदेशक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी प्रो. (ब्रिगेडियर) डॉ. राजू अग्रवाल तथा एनबीईएमएस की गवर्निंग बॉडी की सदस्य एवं एनबीईएमएस प्रोफेशनल कमेटी फॉर कम्युनिकेशन स्किल डेवलपमेंट की अध्यक्षा डॉ. एस. एन. बसु के संरक्षण में आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम के आयोजन की जिम्मेदारी डॉ. उषा दीदवानिया (आयोजन अध्यक्ष) एवं डॉ. मुक्ता अग्रवाल, प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग, एम्स पटना (आयोजन सचिव) द्वारा निभाई जा रही है।
कार्यक्रम के सफल आयोजन की उम्मीद करते हुए प्रो. (ब्रिगेडियर) डॉ. राजू अग्रवाल ने कहा कि प्रभावी संवाद गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की आधारशिला है। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम ऐसे स्वास्थ्य पेशेवर तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है जो चिकित्सकीय दक्षता के साथ-साथ संवेदनशील एवं प्रभावी संवाद कौशल भी रखते हों। उन्होंने कहा कि आज के समय में प्रभावी संवाद केवल जानकारी देने तक सीमित नहीं है बल्कि यह सहानुभूति, रोगी सुरक्षा, साझा निर्णय, नैतिक चिकित्सा एवं बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का महत्वपूर्ण आधार बन चुका है। इसी उद्देश्य के साथ आयोजित यह कार्यक्रम चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में संवाद कौशल को और सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा।
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