ऋषिकेश , सितंबर 12 -- उत्तराखंड के एम्स ऋषिकेश में नुकीली वस्तु से दिल में लगी गंभीर चोट के बाद जिंदगी और मौत से जूझ रहे एक युवक की एम्स के ट्रॉमा विशेषज्ञों ने सफल सर्जरी कर जान बचा ली। बेहद जोखिमभरी परिस्थितियों में चिकित्सकों ने धड़कते दिल के साथ ऑपरेशन किया। चिकित्सीय भाषा में इसे ऑफ-पंप कार्डियक सर्जरी कहा जाता है।

संस्थान के अनुसार उत्तराखंड में ट्रॉमा के मामले में इस तरह की यह पहली ऑफ-पंप कार्डियक सर्जरी है।

श्यामपुर निवासी अखिल सती (21) को उनके पिता गत 27 अगस्त की मध्यरात्रि गंभीर हालत में एम्स ऋषिकेश की ट्रॉमा इमरजेंसी लेकर पहुंचे थे। युवक के दिल में किसी नुकीली वस्तु से गहरी चोट लगी थी और उसका रक्तचाप बेहद कम हो गया था। दिल में चोट के कारण उसकी स्थिति लगातार गंभीर बनी हुई थी। चिकित्सकों ने बिना समय गंवाए तत्काल लाइफ सेविंग सर्जरी करने का निर्णय लिया।

ट्रॉमा सर्जन डॉ. नीरज कुमार ने शनिवार को जानकारी देते हुए बताया कि मरीज की हालत इतनी नाजुक थी कि सर्जरी हार्ट-लंग मशीन के बिना करनी पड़ी। धड़कते दिल के साथ की गई इस जटिल सर्जरी में चिकित्सकों को अत्यधिक सावधानी के साथ उपचार करना पड़ा। ऑपरेशन के बाद मरीज को छह दिनों तक गहन चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया और स्वास्थ्य में सुधार होने पर तीन सितंबर को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

ट्रॉमा सर्जरी विभाग के हेड प्रो. एम. क्यू. आजम ने कहा कि दिल में गहरी चोट के मामलों में समय सबसे महत्वपूर्ण होता है। ऐसे मरीजों की जान बचाने में चिकित्सकों की विभिन्न टीमों के बीच बेहतर तालमेल अहम भूमिका निभाता है। ट्रॉमा सर्जरी, एनेस्थीसिया, ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन और नर्सिंग टीम के समन्वित प्रयास से यह जटिल सर्जरी सफल हो सकी।

सर्जरी टीम में डॉ. नीरज कुमार के साथ डॉ. एकता, डॉ. रुशल और डॉ. गर्वित शामिल रहे। एनेस्थीसिया टीम में डॉ. प्रवीण तलवार, डॉ. संदीप और डॉ. मिन्हाज का महत्वपूर्ण सहयोग रहा। एम्स ऋषिकेश की कार्यकारी निदेशक प्रो. मीनू सिंह ने पूरी टीम के प्रयासों की सराहना करते हुए इसे संस्थान की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।

ट्रॉमा सर्जरी विभाग के फैकल्टी डॉ. मधुर उनियाल ने बताया कि इस तरह की गंभीर चोटों में मरीज के जीवित बचने की दर बेहद कम होती है। उन्होंने कहा कि पिछले सात वर्षों में ट्रॉमा सर्जरी विभाग ने अपनी क्षमताओं को मजबूत किया है, जिसके चलते अब दुर्लभ और चुनौतीपूर्ण मामलों का भी सफलतापूर्वक उपचार किया जा रहा है।

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