अमृतसर , मार्च 02 -- मध्य प्रदेश के रतलाम में रविवार को लोक सेवा आयोग की परीक्षा के दौरान एक अमृतधारी सिख छात्रा की दस्तार (पगड़ी) और कृपाण उतरवाने के मामले पर शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने कड़ा ऐतराज जताया है।

श्री धामी ने सोमवार को कहा कि पूरा देश सिख धर्म के सिद्धांतों और परंपराओं से अच्छी तरह वाकिफ है और सिख 'ककारों' (धार्मिक प्रतीकों) के बारे में भी लोगों को किसी प्रकार की अज्ञानता नहीं है। इसके बावजूद ककारों पर सवाल उठाना बेहद दुखद है। उन्होंने कहा कि सिख बच्चों को परीक्षाओं में बार-बार ककार पहनने से रोकना देश के संविधान का उल्लंघन है। यह सिखों को अपने ही देश के अंदर बेगानेपन का अहसास कराने जैसा है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि भले ही परीक्षा स्टाफ ने बाद में माफी मांग ली है, लेकिन ऐसी घटना घटने से सिख भावनाओं को गहरी ठेस पहुंची है। उन्होंने कहा कि एसजीपीसी द्वारा अपने जनरल इजलास (आम सभा) के दौरान ऐसी घटनाओं के विरुद्ध विशेष प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को भेजे जाते हैं, जिस पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।

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