भुवनेश्वर , अगस्त 29 -- बीजू जनता दल (बीजद) अध्यक्ष एवं ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन (एमएमडीआर संशोधन) विधेयक, 2026 का समर्थन करने पर राज्य से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सांसदों पर संसद में राज्य के हितों की रक्षा करने में विफल रहने का आरोप लगाया।

भाजपा सांसदों को लिखे एक पत्र में श्री पटनायक ने 13 अगस्त को लोकसभा में इस विधेयक के पारित होने को 'ओडिशा के लिए काला दिन' करार दिया। उन्होंने उस विधेयक का समर्थन करने के उनके फैसले पर सवाल उठाया, जिसके बारे में उन्होंने दावा किया कि खनिज समृद्ध राज्य के लिए इसके गंभीर वित्तीय और प्रशासनिक परिणाम होंगे।

श्री पटनायक ने सांसदों को याद दिलाया, "संसद भारतीय लोकतंत्र का सर्वोच्च मंदिर है। सांसद के रूप में आप ओडिशा की आवाज हैं।" उन्होंने सांसदों को ध्यान दिलाया कि जनता ने उन्हें राज्य और उसके लोगों के हितों की रक्षा करने का जनादेश देकर चुना है।

भाजपा सांसदों पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि इस कानून का उनका समर्थन 'अत्यंत चिंता का विषय' है। उन्होंने आरोप लगाया कि सांसद उन लोगों की उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे, जिन्होंने उन पर भरोसा जताया था।

श्री पटनायक ने आरोप लगाया कि इसके दूरगामी प्रभावों के बावजूद लोकसभा में इस विधेयक को 10 मिनट से भी कम समय की चर्चा में पारित कर दिया गया। उन्होंने दावा किया कि भारत की कुल खनिज संपदा में लगभग 44 प्रतिशत की हिस्सेदारी रखने वाला ओडिशा इस संशोधन से सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले राज्यों में शामिल होगा।

श्री पटनायक ने कहा कि इस संशोधन के कारण ओडिशा को हर वर्ष 12,000 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हो सकता है, जिससे समय के साथ राज्य को लाखों करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ सकता है। उन्होंने तर्क दिया कि इससे भी बड़ा मुद्दा अपने खनिज संसाधनों और खनिज समृद्ध भूमि पर राज्य के नियंत्रण का खत्म होना है। उन्होंने कहा, "एक ही विधायी फैसले से हमारे अपने खनिजों और हमारी खनिज समृद्ध भूमि पर से हमारा नियंत्रण छीन लिया गया और यह सब आपकी मौजूदगी में हुआ।"उन्होंने इस मुद्दे को ओडिशा के अधिकारों की बड़ी राजनीतिक लड़ाई में बदलने की कोशिश की। उन्होंने तर्क दिया कि यह कानून राज्य के युवाओं और भावी पीढ़ियों के साथ-साथ खनन के पर्यावरण व सामाजिक नुकसान को झेलने वाले लोगों के साथ अन्याय है।

श्री पटनायक ने भाजपा सांसदों से इस मुद्दे पर पार्टी लाइन से अलग हटने, अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनने और इस संशोधन को वापस लेने की मांग करने का आग्रह किया, जो उनके अनुसार राज्य सरकार के अधिकारों को छीनता है। उन्होंने कहा, "इतिहास आपका आकलन इस बात से नहीं करेगा कि आप किस पार्टी के साथ खड़े थे, बल्कि इस बात से करेगा कि जब सबसे ज्यादा जरूरत थी, तब आप ओडिशा के लिए खड़े हुए या नहीं।"पूर्व मुख्यमंत्री ने इसे 'ऐतिहासिक मोड़' बताते हुए भाजपा सांसदों से पार्टी के प्रति निष्ठा और उन्हें लोकसभा भेजने वाले राज्य के हितों के बीच किसी एक को चुनने को कहा।

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