नयी दिल्ली , अगस्त 08 -- दिल्ली के गृह मंत्री आशीष सूद ने शनिवार को दिल्ली फॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी (एफ़एसएल) का निरीक्षण कर इसकी आधारभूत संरचना, जांच सुविधाओं और कार्यप्रणाली की समीक्षा की।

श्री सूद ने इस दौरान फॉरेंसिक जांच को मजबूत करने के लिए उठाए गए कदमों और प्रयोगशाला की उपलब्धियों की जानकारी ली। उन्होंने एफ़एसएल लंबित मामलों में 72 फीसदी की कमी आने पर अधिकारियों और कर्मचारियों के प्रयासों की सराहना की।

गृह मंत्री ने बताया कि जून 2025 में एफ़एसएल में लंबित मामलों की संख्या 27,585 थी, जो 31 जुलाई 2026 तक घटकर 7,178 रह गई है। पिछले 12 महीनों में कुल 3,49,519 एग्जिबिट्स का निस्तारण किया गया है। उन्होंने कहा कि पॉक्सो और एनडीपीएस मामलों की रिपोर्ट वर्तमान में 15 कार्य दिवसों के भीतर उपलब्ध करायी जा रही है। नवंबर 2025 से प्रयोगशाला में हर महीने 3,000 से अधिक मामलों की जांच क्षमता हासिल की जा रही है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में एफ़एसएल को वैज्ञानिक और मानव संसाधन के स्तर पर लगातार आधुनिक बनाया जा रहा है। वर्ष 2025 में मामलों की जांच और रिपोर्टिंग के लिए 247 वैज्ञानिक कर्मचारियों की संविदा आधार पर मिशन मोड में भर्ती की गयी। इसके अलावा घटनास्थल की जांच और अन्य फॉरेंसिक कार्यों के लिए 90 एमएससी योग्य इंटर्न को 30 हजार रुपये मासिक स्टाइपेंड पर नियुक्त करने की पहल की गयी है।

उन्होंने बताया कि एफ़एसएल को अत्याधुनिक बनाने के लिए आवश्यक मशीनरी, वैज्ञानिक उपकरण, साइबर वर्कस्टेशन और उपभोग्य सामग्री की खरीद की गयी है। दिल्ली पुलिस की छह रेंजों और 15 जिलों में नए आपराधिक कानूनों के अनुरूप घटनास्थल पर त्वरित वैज्ञानिक सहायता उपलब्ध कराने के लिए फॉरेंसिक विशेषज्ञ तैनात किये गये हैं। विभिन्न रेंजों में फॉरेंसिक टीमों के इस्तेमाल के लिए छह मोबाइल फॉरेंसिक वैन भी खरीदी और संचालित की जा रही हैं।

श्री सूद ने कहा कि लंबित मामलों को कम करने के लिए एफ़एसएल ने बेहतर मानव संसाधन प्रबंधन, विस्तारित और लचीले कार्य घंटे, सप्ताहांत में काम, कर्मचारियों के लिए परिवहन, सुरक्षा एवं भोजन की व्यवस्था, स्टाफ रोटेशन तथा विभिन्न डिवीजनों के बीच बेहतर समन्वय जैसे कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक जांच प्रभावी आपराधिक न्याय प्रणाली की रीढ़ है। समयबद्ध फॉरेंसिक जांच से मुकदमों में होने वाली देरी कम करने के साथ नागरिकों को शीघ्र न्याय दिलाने में भी मदद मिलती है।

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