लखनऊ , जून 08 -- उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने जून माह में 10 प्रतिशत ईंधन एवं विद्युत क्रय समायोजन अधिभार (एफपीपीसीए) की वसूली को लेकर उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन पर गंभीर सवाल उठाते हुए विद्युत नियामक आयोग से मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।

उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष एवं राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने सोमवार को आयोग के समक्ष दाखिल आपत्ति प्रस्ताव में कहा कि पावर कॉरपोरेशन द्वारा प्रदेश के उपभोक्ताओं से 10 प्रतिशत एफपीपीसीए वसूला जा रहा है, जबकि आयोग द्वारा मांगे गए आंकड़े और गणनाएं अब तक प्रस्तुत नहीं की जा सकी हैं।

उन्होंने कहा कि आयोग ने इसे अपने विनियमों के प्रावधान 16.1 के उल्लंघन का मामला मानते हुए पावर कॉरपोरेशन के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक को सात दिन के भीतर यह स्पष्ट करने का निर्देश दिया था कि पुराने बकाये और वर्तमान विद्युत क्रय लागत के किन आंकड़ों के आधार पर एफपीपीसीए लगाया गया है। निर्धारित अवधि समाप्त होने के बाद भी कॉरपोरेशन जवाब प्रस्तुत नहीं कर सका और अतिरिक्त दो सप्ताह का समय मांगा गया है।

श्री वर्मा ने कहा कि यदि पावर कॉरपोरेशन के पास एफपीपीसीए लागू करने से संबंधित आवश्यक आंकड़े उपलब्ध थे, तो आयोग के समक्ष उन्हें प्रस्तुत करने में कठिनाई नहीं होनी चाहिए थी। उन्होंने सवाल उठाया कि जब आयोग ने केवल गणनात्मक आधार और आंकड़ों की जानकारी मांगी है, तब अन्य राज्यों की व्यवस्थाओं और नियामकीय ढांचे का अध्ययन करने की आवश्यकता क्यों पड़ रही है।

उन्होंने आरोप लगाया कि इससे यह संदेह उत्पन्न होता है कि एफपीपीसीए लागू करने के लिए जिन आधारों का उपयोग किया गया, वे स्पष्ट रूप से उपलब्ध नहीं हैं। उन्होंने कहा कि यदि आवश्यक आंकड़े और गणनाएं मौजूद नहीं हैं, तो यह गंभीर विषय है कि उपभोक्ताओं पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त भार किस आधार पर डाला गया।

उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा कि पिछले एक वर्ष के दौरान एफपीपीसीए की वसूली प्रक्रिया भी अब सवालों के घेरे में आ गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि एक ओर पावर कॉरपोरेशन आयोग के आदेशों का पालन करने में असफल रहा है, वहीं दूसरी ओर उपभोक्ताओं से अतिरिक्त शुल्क की वसूली लगातार जारी है।

उन्होंने कहा कि यदि समय विस्तार की आवश्यकता थी तो निर्धारित अवधि समाप्त होने से पहले आयोग से अनुरोध किया जाना चाहिए था। सात दिन बीत जाने के बाद अतिरिक्त समय मांगना मामले को टालने का प्रयास प्रतीत होता है।

उपभोक्ता परिषद ने आयोग से मांग की है कि एफपीपीसीए की वर्तमान वसूली पर तत्काल रोक लगाई जाए, पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए तथा आयोग के आदेशों की अवहेलना के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

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