जयपुर , जून 09 -- केन्द्रीय वाणिज्य मंत्रालय में संयुक्त सचिव साकेत कुमार ने कहा है कि मुक्त व्यापार क्षेत्र (एफटीए) के भागीदार देशों के बाजार भारतीय आभूषण क्षेत्र को निर्यात के अपार अवसर प्रदान करते हैं।

श्री कुमार मंगलवार को यहां आयोजित रत्न और आभूषण निर्यात संवर्धन परिषद (जीजेईपीसी) के साथ साझेदारी में जयपुर में "रत्न और आभूषण क्षेत्र के लिए एफटीए का लाभ उठाने" पर केंद्रित आउटरीच कार्यक्रम में बोल रहे थे। इस कार्यक्रम में निर्यातकों, निर्माताओं, एमएसएमई और अन्य उद्योग हितधारकों ने भाग लिया।

यह कार्यशाला यह सुनिश्चित करने के लिए सरकार के निरंतर प्रयास का हिस्सा है कि निर्यातक-विशेष रूप से एमएसएमई और क्लस्टर आधारित उद्यम-भारत की नई पीढ़ी के एफटीए के माध्यम से सृजित बाजार पहुंच का पूरी तरह से लाभ उठा सकें।

उन्होंने बताया कि पिछले बारह वर्षों में भारत का कुल निर्यात लगभग दोगुना हो गया है, जो वित्त वर्ष 2025-26 में 863 बिलियन अमरीकी डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया है, जो वित्त वर्ष 2014-15 में 468 बिलियन अमरीकी डॉलर था। वाणिज्यिक निर्यात 442 अरब अमेरिकी डॉलर और सेवा निर्यात 421 अरब अमेरिकी डॉलर रहा, जो भारतीय अर्थव्यवस्था के लचीलेपन और प्रतिस्पर्धा को दर्शाता है।

हाल के वर्षों में भारत के एफटीए व्यापक, गहरे और व्यावसायिक रूप से अधिक सार्थक हुए हैं, जिसमें उत्पादों, सेवाओं, निवेश, मानकों और व्यापार सुविधा की एक विस्तृत श्रृंखला शामिल है। इन समझौतों के तहत रत्न और आभूषण एक प्रमुख लाभार्थी क्षेत्र के रूप में उभरा है।

एफटीए भागीदार देश सामूहिक रूप से सालाना 55 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक के आभूषणों का आयात करते हैं। भारत का वर्तमान हिस्सा 8 अरब अमेरिकी डॉलर है, जो विकास के लिए पर्याप्त गुंजाइश की ओर इशारा करता है। राजस्थान, का भारत के रंगीन रत्न निर्यात का 97 प्रतिशत हिस्सा है और चांदी और अन्य आभूषणों में मजबूत उपस्थिति रखता है, इस अवसर को भुनाने के लिए विशिष्ट रूप से तैयार है।

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